इसके चलते पुत्री को कई बार मारपीट कर घर से निकाल दिया। करीब एक माह पूर्व उसने लालसोट में ही समाज के लोग एकत्र किया था, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने जिम्मेदारी लेते हुए उसकी पुत्री को ससुराल में ही रोक लिया। प्राथमिकी ने पिता ने बताया कि शनिवार दोपहर उसके दामाद ने लखन की हालत गंभीर बताते हुए मिलने के लिए आने की बात कही। इसके बाद ससुराल पक्ष के लोग नियोजित ढंग से महज दिखावा करने के लिए उसकी पुत्री को जयपुर ले गए। जबकि पति महेन्द्र, ससुर हीरालाल, सास बाड़ादेवी, जितेंद्र, ममता, राजू, हरषी एवं प्रभु ने दहेज के लोभ में षडय़ंत्र रच कर उसकी हत्या कर दी और सबूत नष्ट करने की नियत से रात को ही दाह संस्कार करने पर आमादा हो गए।