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वेंटिलेटर पर चिकित्सा व्यवस्था: अस्पताल ही बीमार, तो फिर कैसे हो उपचार

Medical system on ventilator: hospital is ill, then how should treatment: मरीजों की भीड़, संसाधन कम, घंटों कतार में खड़े रहने की मजबूरी

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वेंटिलेटर पर चिकित्सा व्यवस्था: अस्पताल ही बीमार, तो फिर कैसे हो उपचार

वेंटिलेटर पर चिकित्सा व्यवस्था: अस्पताल ही बीमार, तो फिर कैसे हो उपचार

दौसा. प्रदेश सरकार ने अपने घोषणा पत्र में चिकित्सा सेवाओं को दुरुस्त करने का वादा किया था, लेकिन जब सोमवार को राजस्थान पत्रिका की टीमों ने जिले के शहरी व दूरस्थ अस्पतालों का जायजा लिया तो हाल-बेहाल मिले। कहीं पर चिकित्सक व चिकित्साकर्मी मौजूद नहीं थे तो कहीं पर मरीजों को इलाज की उचित सुविधा नहीं मिल रही थी। पत्रिका पड़ताल में चिकित्सा व्यवस्था की पोल उजागर हुई। चिकित्सकों के आगे मरीजों की कतार लगी हुई थी तो कहीं जांच कराने के लिए भटकते नजर आए। ग्रामीण अस्पतालों में मरीज एक्स-रे के लिए भटक रहे थे। जिला अस्पताल, बांदीकुई व लालसोट सरीखे बड़े अस्पतालों में सोनोग्राफी नहीं हो रही थी।

Medical system on ventilator: hospital is ill, then how should treatment

भटक रहे थे परिजन, अव्यवस्थाओं का आलम


जिला अस्पताल में राजस्थान पत्रिका की टीम पहुंची तो यहां पर अधिकांश चिकित्सकों के कक्षा के आगे मरीजों की कतार लगी हुई थी। कई कक्षों में चिकित्सक ही नहीं थे। मातृ शिशु कल्याण केन्द्र के सामने प्रसूताओं के परिजन भटक रहे थे। उनको चिकित्साकर्मी उचित जवाब नहीं दे रहे थे। ब'चों के वार्ड में एसी नहीं चलने से शिशुओं को सर्दी में परेशानी हो रही थी। कई गद्दों पर बैडशीट बिछी हुई थी तो कइयों पर नहीं। एक जना बाल कल्याण समिति के सदस्यों से भी शिकायत कर रहा था कि उन्होंने ब'चे को चार दिन पहले भर्ती कराया था। जिस चिकित्सक ने भर्ती किया था उसको सम्भालने ही नहीं आ रहे हैं।

शौचालयों में गंदगी का आलम था। पर्ची के लिए एक ही काउंटर होने की वजह से महिला मरीजों का काफी देर में नम्बर आ रहा था। कतार में कई महिलाएं तो थक कर बैठी नजर आई। गर्भवती महिलाओं का घंटों इंतजार के बाद चिकित्सक के पास नम्बर आ रहा था। इसी प्रकार सर्जीकल वार्ड में भी हालात ऐसे ही देखे गए। यहां भी शौचालय में गंदगी का आलम था। पानी नहीं आ रहा था। मेडिकल वार्ड में बैडों पर गद्दे फटे थे। सर्दी से बचाव के इंतजाम नहीं थे। दवा केन्द्र पर लम्बी कतार लग रही थी। सोनोग्राफी नहीं हो रही थी।

Medical system on ventilator: hospital is ill, then how should treatment

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आलूदा


पत्रिका टीम सोमवार सुबह जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर प्राथमिक चिकित्सालय आलूदा पहुंची। यहां चिकित्सक साढ़े नौ बजे पहुंची। इस अस्पताल का आउटडोर औसत मात्र 30 मरीज है। मरीजों ने बताया कि यहां पर एक-दो के अलावा कोई जांच भी नहीं हो रही है। जगदीश बैरवा ने बताया कि यहां पर वे बालक का इलाज कराने आए, लेकिन कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में चारदीवारी सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं है। इधर, चिकित्सक डॉ. सविता जोरवाल ने बताया कि वे समय पर अस्पताल आती हैं। मरीजों को समय पर इलाज मिलता है।

इनका कहना है...


जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था ठीक है। मरीजों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। फिर भी कोई चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी लापरवाही करता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- डॉ. सीएल मीना, पीएमओ जिला अस्पताल दौसा

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