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उम्मीदों की रोशनी लेकर आई नए साल की नई किरण

वर्ष 2018 में दौसा की जनता की ये हैं 18 उम्मीदें    

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dausa sunrise

दौसा. जिलेवासियों को वर्ष 2018 के आगमन के साथ ही नए विकास एवं नई उम्मीदों की किरण के साथ ही सौगात मिलने का पूरे वर्ष इंतजार रहेगा। बीते वर्ष मेंं भी जिलेवासियों को खास उम्मीदें थी, लेकिन वर्ष 2017 कुछ अच्छा नहीं बीता है। जिले को विकास की जो सौगात मिलनी चाहिए थी, उनमें से अधिकांश उम्मीदें पूरी नहीं हो पाई। पिछले वर्ष न अच्छी बरसात हो पाई और नहीं विकास को चार चांद लगे। नोटबंदी व जीएसटी ने श्रमिक से लेकर उद्योगपति तक की कमर तोड़कर रख दी। यह वर्ष राज्य की भाजपा सरकार का भी अन्तिम वर्ष है। ऐसे में जिलेवासियों को सरकार से विकास की उम्मीदें भी ज्यादा हैं।



1. पानी की समस्या का हो समाधान
जिले को पिछले कई वर्षों से ईसरदा बांध के पानी का इंतजार है। जिलेभर में कुछ शहर व कस्बों को छोड़ दे तो पानी की त्राहि-त्राहि मची हुई है। जिला मुख्यालय व बांदीकुई में तो अब कभी 9 तो कभी 10 दिन में पानी मिल रहा है। लोगों को उम्मीद है कि ईसरदा कॉपर डेम का शीघ्र निर्माण होकर जिले के लोगों की प्यास बुझाएगा। वहीं बीसलपुर से दौसा में आ रहे पानी की मात्रा में वृद्धि होने की उम्मीद से लोगों के कंठ तर हो सकेेंगे।

2. सीवरेज का सपना हो साकार
जिला मुख्यालय पर प्रदेश की कांगे्रस सरकार ने सीवरेज का सपना दिखाया था। उस वक्त शहर में सीवरेज डालने का सर्वे तक भी हुआ था, लेकिन उसके बाद कार्य पर तो ब्रेक लग गए। ऐसे में लोगों को आस है कि सीवरेज का कार्य शीघ्र पूरा होगा।

3. ट्रेन की सीटी सुनने का इंतजार
दौसा से गंगापुर के लिए करीब दो दशक पहले रेल परियोजना की स्वीकृति मिल गई थी। स्वीकृति के करीब आठ वर्ष बाद इस परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू हो गया था। फिर अभी तक यह परियोजना पूरी नहीं हो पाई। कई वर्षों बाद लालसोट की पहाड़ी में पिछले वर्ष सुरंग आर-पार तो हो गई, लेकिन अब जनता को उम्मीद है कि वर्ष 2018 में दौसा से डीडवाना तक के लोगों को रेल की सीटी सुनाई दे जाएगी। हालांकि दौसा से डिडवाना तक रेलवे लाइन बिछाने, प्लेटफॉर्म निर्माण एवं पुलियाओं का निर्माण भी पूरा हो चुका है। ट्रेन चलाने के लिए मुख्य संरक्षा आयुक्त ने सेफ्टी क्लियरेंस भी दिया जा चुका है, अब लोगों को इस मार्ग पर इस वर्ष ट्रेन चलने की उम्मीद है।

4. आगरा फाटक बने ओवरब्रिज
बांदीकुई में आगरा फाटक शहर की मुख्य समस्या है। कई बार तो इस फाटक पर लोगों को घंटो तक इंतजार करना पड़ जाता है। नए वर्ष में बांदीकुई वासियों को फाटक पर रेलवे ऑवरब्रिज निर्माण की उम्मीद है। इसी तरह भांकरी में भी लोगों को फाटक पर ओवरब्रिज मिलने की उम्मीद है।

5. बांदीकुई व महुवा बने जिले
बांदीकुई व महुवा के लोग कई दशक से इन शहरों को जिला बनवाने के लिए मांग कर रहे हैं। यहां के लोग हर वर्ष के बजट में जिला बनवाने की बाट जोहते हैं। लोगों को उम्मीद है कि सरकार अपने इस अंतिम वर्ष में उनको जिला बनाने की सौगात दें दे तो विकास को चार चांद लग जाए।

6. शिक्षा में भी बड़ी उम्मीद
दौसा में कला कॉलेज के लिए बजट स्वीकृत होने के बाद भी नया भवन नहीं बन रहा है। महिला कॉलेज में विज्ञान संकाय खुलवाने, बांदीकुई की महिला कॉलेज को सरकारीकरण एवं तकनीकी शिक्षा में भी लोगों को काफी उम्मीद है। पीजी कॉलेज में विज्ञान संकाय को स्ववित्तपोषी से सरकारीकरण की मांग। बांदीकुई में केन्द्रीय कॉलेज खुलवाने की मांग है।

7. जेल भवन का हो उद्घाटन
जिले की नांगलराजावतान तहसील के श्यालावास में सरकार ने 32 करोड़ रुपए की लागत से एक हजार खूंखार कैदियों के रहने की क्षमता की जेल का निर्माण तो करा लिया, लेकिन यह भवन उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। लोगों को अपेक्षा है कि इस वर्ष जेल भवन का उद्घाटन हो जाएगा।

8. सीमेटेड मार्ग पर चलने का सपना:
मनोहरपुर - कौथून राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन निर्माण के लिए सरकार ने करीब 8 सौ करोड़ रुपए बजट घोषित कर हाइवे का निर्माण शुरू करा दिया है। इसमें दौसा से लालसोट तक सीमेंटेड फोरलाइन सड़क निर्माण का कार्य तीव्र गति से जारी है। लोगों को आस है कि इस सीमेटेड मार्ग पर चलने का सपना इस वर्ष पूरा हो जाएगा।

9. मेडिकल कॉलेज खुले
जिला अस्पताल में वर्तमान में 250 बैड हैं। बीमारियों के सीजन के वक्त बैड कम होने से मरीजों को कई बार तो बैंचों एवं नीचे ही बैठ कर इलाज कराना पड़ता है। पिछले वर्ष चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने 50 बैड़ों की घोषणा भी की थी। इस वर्ष भी 50 बैड घोषणा की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज खुले तो चिकित्सा व्यवस्था को भी संबल मिलेगा।

10. सीसीटीवी कैमरे लगे
पुलिस प्रशासन ने पिछले वर्ष शहर में करीब 400 सीसीटीवी कैमरे लगाने की घोषणा की थी। यदि शहर में प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी लग जाए तो निश्चित ही चोरी व अन्य अपराधों पर अंकुश लग सकता है।



11. सिलिकोसिस है चुनौती
जिले के पत्थर उद्योग से जुड़े श्रमिकों में सिलिकोसिस का ग्रहण लग रहा है। सिलिकोसिस बीमारी के भय से इन उद्योगों में श्रमिक काम करने के लिए ही तैयार नहीं है। इन श्रमिकों को इस बीमारी से निपटने के लिए सरकार से बड़ी उम्मीद है। इस कार्य को करने वाले दर्जनों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं।



12. रीको औद्योगिक विकास को आस
किसी भी जिले की आर्थिक रीढ़ उसके आद्योगिक विकास के ताने-बाने से होती है। दौसा में रीको औद्योगिक क्षेत्र का विकास, लवाण का दरी उद्योग पनपने व भाण्डारेज में बनने वाले कालीन पार्क एवं सिकंदरा ग्रोथपोल बनने की भी लोगों को उम्मीद है।

13. रिंग रोड बने ...
शहर के दूध की डेयरी से सूरजपुरा, गांगल्यावास व चांवड होते हुए रिंग रोड बनाने की कवायद चलते करीब एक दशक होता आया है। श्यदि रिंग रोड बन जाए तो शहर में भारी वाहनों के यातायात की समस्या से निजात मिल सकती है।



14. हटे तारों का जाल
शहर में करीब 6 वर्ष पहले करीब 18 करोड़ रुपए खर्च कर शहर में खम्भों से नंगे तारों का जाल हटा कर भूमिगत केबल लाइन बिछा कर बिजली सप्लाई का काम शुरू हुआ था। लेकिन शहर में आज तक न तो खम्भों से बिजली के नंगों तारों का जाल हटा है और नहीं तरीके से भूमिगत लाइन बिछ पाई है। शहरवासियों को उम्मीद है कि भूमिगत केबल फिर से जमीन में अच्छी तरह बिछाई जाकर हादसों से निजात मिलेगी।

15. पर्यटक स्थलों का हो विकास
जिले में आभानेरी की चांदबावड़ी के अलावा भी कई पर्यटक स्थल हंै। बसवा का झाझीरामपुरा, भाण्डारेज की बावड़ी, आलूदा का कबाणिया, सिकराय में आमोल, खवारावजी का महल व किला एवं माधोसागर व मोरोली बांध को पर्यटक स्थलों में शामिल कर लिया जाए तो पयर्टन क्षेत्र के मानचित्र में दौसा का नाम भी शामिल हो जाए।

16. क्षतिग्रस्त सड़कों की हो मरम्मत
जिले में कुछ मुख्य सड़कों के अलावा ग्रामीण सड़कों की हालत खराब है। इन पर पग-पग पर हो रहे गड्ढों से सफर कठिन हो रहा है। यदि इन सड़कों की मरम्मत हो जाए तो जिलेवासियों को काफी सहलूयित मिल जाए।

प्रत्येक गांव से जुड़ें रोडवेज
17. लोगों को उम्मीद है कि सड़कों का निर्माण होने के साथ ही प्रत्येक गांव रोडवेज सेवा से जुड़ें। ताकि उन्हें अवैध रूप से चलने वाले वाहनों में बैठकर जोखिमभरी यात्रा नहीं करनी पड़ी।

18. दु्रतगामी टेनों का हो ठहराव
जिले में दौसा. बांदीकुई, बसवा स्टेशनों पर भी द्रुतगामी ट्रेनों का ठहराव हो। जयपुर-अलवर मार्ग पर भी ट्रेनों का संचालन बढ़े।