
नहीं उगा बाजरा, आर्थिक संकट में भूमिपुत्र
दौसा.
महंगे भाव का बाजरे का बीज खरीद कर एवं ट्रैक्टरों के हळ से महंगी बुवाई करा तो दी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर बाजरा अंकुरित नहीं होने से खेत ही खाली रह गए हैं। कुएं एवं बोरवेलों में पानी की कमी के कारण तो खेतों में रबी की पैदावार नहीं हो पाई थी, लेकिन अब खेतों में खरीफ में बाजरा भी अंकुरित नहीं होने से किसान पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा है।
किसानों का कहना है कि न तो खेतों को देखने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी पहुंच रहे हैं और नहीं बाजरे का बीज बेचने वाली कम्पनी के अधिकारी। उल्लेखनीय है कि जिले में करीब एक लाख 98 हजार हैक्टेयर भूमि में खरीब की बुवाई होती है। इसमें बाजरे की बुवाई करीब डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि में बुवाई की जाती है।
कहां से आएगा अनाज व चारा
बाजरा नहीं उगने के कारण अब किसानों के सामने अनाज व चारे का संकट मण्डराने लगा है। जिले में अधिकांश किसानों ने रबी के सीजन के समय भी गेहूं व तूड़ी खरीदकर ही काम चलाया था, उनको आस थी कि खरीफ की अच्छी पैदावार होगी, लेकिन अब खेतों में बीज ही अंकुरित नहीं हुआ है तो उनके सामने फिर से अनाज एवं चारे का संकट खड़ा हो गया है।
बीज खराब
किसानों का कहना है कि उन्होंने अच्छी कम्पनियों का महंगा 400 रुपए से 480 रुपए के डेढ़ किलो बीज की थैलियां खरीद कर खेतों में बीज बोया है। प्रति कच्चा बीघा 200 रुपए टै्रैक्टर वालों को हळ से बुवाई का भी रुपया दिया है। फिर भी उनके खेत खाली रह गए हैं।
इस इलाके में आई अधिक परेशानी
जिले के सैंथल इलाके के बापी, चैनपुरा, ढाय, झेरा, नांगलराजावतान के पापड़दा, आलूदा, हापावास समेत कई गांवों में बीज ही अंकुरित नहीं हुआ। इसके अलावा लवाण, दौसा के श्यालावास, रलावता, रामसिंहपुरा, जयसिंहपुरा समेत दर्जनों गांवों में किसानों ने बाजरे की बुवाई तो कर दी, लेकिन स्थिति यह है कि खेत खाली के खाली ही रह गए हैं।
मुआवजा दिलाने की मांग
सैंथल इलाके के बापी, ढायझेरा, चैनपुरा समेम कईग गांवों के किसान पिछले दिनों प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन देकर बाजरे की बीज की जांच कराने, दोषी कंपनी पर जुर्माना लगवाने तथा किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग कर चुके हंै। किसानों ने बताया कि बीज खरीदते समय बड़े- बड़े दावे किए गए थे, लेकिन इन दावों ने अब किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
जांच कराई जा रही है
कृषि विस्तार उपनिदेशक श्रीकांत अग्निहोत्री का कहना है कि बाजरे के बीज अंकुरित नहीं होने के पीछे कई कारण है। कहीं बरसात की कमी, कहीं बुवाई के बाद बारिश से जमीन पर पपड़ी आना है। हालांकि उनके पास कई शिकायतें आई है। जांच भी कराई जा रही है। सभी कम्पनियों के बीज के नमूने लेकर जांच के लिए लेब में भिजवा दिए हैं।
Published on:
10 Jul 2018 11:31 am
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