
पांचाल समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन, परिणय सूत्र में बंधे 27 जोड़े
लालसोट. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, सात फेरों के दौरान मंगल गीतोंं की मधुर लहरिया, दूल्हों संग उत्साहित परिजन, निकासी में नाचते बाराती, दुल्हन को साथ लिए मंडेती, इंतजामों में जुटे समाज के पदाधिकारी एवं तोरण द्वार पर दूल्हों की आरती उतारती महिलाएं।
कुछ ऐसा ही नजारा था शहर के संस्कृत महाविद्यालय परिसर में शनिवार को पीपल पूर्णिमा के अबूझ सावे के मौके पर आयोजित पांचाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन का। पांचाल सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में समाज के 27 नव युगलों ने अग्नि के समक्ष समाज के हजारों लोगों की मौजूदगी में एक दूसरे का हाथ थाम कर परिणय सूत्र बंधन में बंधे।
इस मौके पर मौजूद समाज के हजारों महिला-पुरुषों ने भी वर वधु को खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। पाणिग्रहण संस्कार की रस्म आाचार्य बाबूलाल जोशी श्यामपुरा व अन्य विप्र जनों ने संपन्न कराई। इसके बाद जब विदाई की बेला आई तो हर किसी की आंखें नम हो गई और वधु पक्ष के लोगों ने बेटियों को ससुराल में नए जीवन के लिए विदा किया।
इससे पूर्व आयोजन की शुरुआत के मौके पर सुबह मंडप की रस्म अदा करने के बाद सभी दूल्हों की सामूहिक निकासी निकाली गई।इसमें युवक-युवतियों ने नाचते गाते शिरकत की। तोरण की रस्म के बाद मंच पर सभी नव युगलों ने अपने जीवन साथी के गले में वरमाला डाली।
इस दौरान मुख्य अतिथि मोहनलाल पांचाल, रामसहाय पांचाल, बजरंगलाल पांचाल, पांचाल सेवा समिति के अध्यक्ष जगदीश पांचाल, सामूहिक विवाह सम्मेलन समिति के अध्यक्ष राधेश्याम पांचाल, महामंत्री पप्पू पांचाल, संतोष पांचाल, लल्लू पांचाल, सुरेश पांचाल, बंशीलाल पांचाल, गोपाल पंाचाल, ओमप्रकाश पांचाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी वर वधुओं को वैवाहिक प्रमाण पत्र एवं आशीर्वाद प्रदान किया।
समिति की ओर से दिए उपहार
सामूहिक विवाह सम्मेलन समिति की ओर से जोड़ों को आलमारी, कूलर, बर्तन, बेड, फर्नीचर, टीका, नाक की बाली, पायजेब, सोने के टोप्स समेत कई अन्य उपहार प्रदान किए गए। इसके अलावा समाज के भामाशाह व अन्य जनों ने बढ़-चढ़कर कन्यादान दिया। (नि.प्र.)
Published on:
19 May 2019 08:20 am
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