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रावण संस्कृत के प्रोफेसर तो पार्षद बने हैं लक्ष्मण

Role in ramleela of Shree Ram and Rawan: रामलीला में शिक्षक, सेवानिवृत्त कार्मिक एवं दुकानदार आदि कर रहे अभिनय, दिन में काम-धंधा, रात में रोल

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रावण संस्कृत के प्रोफेसर तो पार्षद बने हैं लक्ष्मण

रावण संस्कृत के प्रोफेसर तो पार्षद बने हैं लक्ष्मण

दौसा. टीवी-इंटरनेट के दौर में भले ही भगवान राम की लीला बेहतर स्वरूप में देखी जा सकती है, लेकिन आंखोंं के सामने सजीव मंचन देखने का मजा अलग ही है। बदलते परिवेश में जिले में रामलीलाओं के मंचन की संख्या भले ही कम हो गई हो, लेकिन यह कलाकारों की जिद का ही नतीजा है कि अभी भी दौसा, बसवा एवं गुढ़ाकटला आदि स्थानों पर रामलीला का मंचन कई दशकों से निरंतर जारी है।

Role in ramleela of Shree Ram and Rawan

खास बात यह हैकि अधिकतर कलाकार नौकरी व अन्य कार्यों से जुड़े हैं। दिनभर की थकान के बावजूद रात को रामलीला में अभिनय करते हैं। मेकअप आदि में काफी समय लगने के कारण यह शाम होते ही कलाकार डे्रसिंग रूम में पहुंच जाते हैं। यहां अपने पात्र की तैयारी के साथ ही दूसरे नए कलाकारों को भी निर्देशित करते हैं।


दौसा के बजरंग मैदान में आध्यात्मिक आदर्श रामलीला समिति की ओर से चल रही रामलीला में राम का अभिनय कर रहे संतोष शास्त्री स्नातक के साथ भागवताचार्य भी हैं। वहीं वार्डपार्षद आशीष शर्मा लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं। तीन पीढ़ी से पार्षद का परिवार रामलीला से जुड़ा है।


भरत की भूमिका निभाने वाले बासखोह निवासी कान्हा राव आकाशवाणी के कलाकार के साथ संगीतज्ञ भी हैं। रावण का अभिनय संस्कृत के प्रोफेसर परमेश्वर गंगावत एवं जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त शंकरलाल शर्मा दशरथ का अभिनय बखूबी कर दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। शंकरलाल तो समिति अध्यक्ष का काम भी संभालते हैं।


इसी तरह मेघनाथ का रोल शारीरिक शिक्षक अमरेश जाकड़, कुम्भकरण ओमप्रकाश गीजगढिय़ा तथा विभीषण का रोल समिति के सचिव व स्नातक राकेश शर्मा बखूबी निभाकर श्रीराम के आदर्शों को चरितार्थ कर रहे हैं। गुरु विशिष्ठ, विश्वामित्र की भूमिका सेवानिवत्त व्याख्याता कजोड़मल शर्मा निभा रहे हैंं। हनुमानजी का रोल अध्यापक बनवारीलाल शर्मा, विभीषण राकेश शर्मा व सुमंत-जनक का रोल भागवतचार्य रूपेश शास्त्री कर रहे हैं। स्नातक अशोक सिन्हा कॉमेडियन का रोल कर दर्शकों से जमकर तालियां बटोरते हैं।


इसी प्रकार कल्याण नाट्य परिषद की ओर से गुढ़ाकटला में पिछले 56 वर्षों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले बांदीकुई, लालसोट सहित जिले के अन्य प्रमुख स्थानों पर रामलीला होती थी, लेकिन अब बंद हो गईहै। बसवा तहसील मुख्यालय पर भी कई दशकों से रामलीला हो रही है।


दर्शकों का घटा क्रेज


बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्व में जब रामलीला हुआ करती थी, तब शाम को ही लोग दरी-पट्टी लेकर मैदान में अपनी जगह बुक कर लेते थे, लेकिन अब आधुनिक चकाचौंध में टीवी व सोशल मीडिया के प्रति बढ़ते चलन ने लोगों में रामलीला देखने का क्रेज घटा दिया है।