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शिव महापुराण : कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

बसवा कस्बे में लोगों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा की।

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शिव महापुराण : कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

बसवा कस्बे के बड़ा महादेवजी मंदिर में शिव महापुराण को लेकर निकाली गई कलश यात्रा में शामिल महिलाएं।

दौसा. बसवा कस्बे के बड़ा महादेवजी मंदिर में शिव महापुराण को लेकर निकाली गई कलश यात्रा में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। 1151 कलशों व तीन बैंड के शाही लवाजमें के साथ निकली विशाल कलश यात्रा को गुरुवार सुबह कल्याणजी मंदिर में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वज व कलश पूजन कराकर रवाना किया।

कलश यात्रा कस्बे के प्रमुख मार्ग सोनी बाजार, बड़ा बाजार, रामलीला मैदान, अस्पताल रोड, नीमला बाजार, रामपुर गेट होती हुई कथा स्थल पर पहुंची। कलश यात्रा में महिला श्रद्धालु सिर पर कलश रखकर भजनों पर नाचते गाते हुए चल रही थी तो पुरुष श्रद्धालु हाथों में ध्वज लेकर जयकारा लगाते हुए चल रहे थे।

कस्बे के लोगों ने यात्रा का रास्ते में जगह-जगह ठंडे पानी व शर्बत की प्याऊ लगाकर स्वागत किया। लोगों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा भी की। यात्रा में भगवान शंकर और राम दरबार की सजीव झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इस मौके पर कस्बे के सभी गणमान्य लोग मौजूद थे।

सजाई सजीव झांकी
लालसोट. शहर के समीप राजौली गांव के तिवाड़ी मोहल्ले में जारी श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म की कथा के प्रसंग के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा वाचक पं. दिवाकर शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है।

अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए।

शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा कथा स्थल जयकारों से गूंजने लगा। इस दौरान भगवान के जन्म की सजीव झांकी भी सजाई गई। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। आरती के बाद कथा का विराम हुआ।