
सिकंदरा गांव में दाल की पकौड़ी बनाते मोहनलाल।
दौसा. सिकंदरा में पिछले 35 वर्षों से पंडितजी ठेले वाले की नमकीन का स्वाद लोगों की जुबान पर सिर चढ़कर बोलता है। रायपुरा गांव के पुष्पेंद्र शर्मा के पिता मोहन लाल शर्मा 1985 से मुख्य सिकंदरा चौराहे पर ठेले पर नमकीन बेचते थे। घर पर बनी पंडित जी की नमकीन स्वाद और शुद्धता के चलते स्थानीय लोगों के साथ राजस्थान के अलग-अलग शहरों के लोगों की पहली पसंद बन गई।
मोहनलाल शर्मा का देहांत होने के बाद उनके बेटे ने नमकीन के स्वाद को बरकरार रखा। पिछले 25 वर्ष से मोहनलाल के बेटे पुष्पेंद्र शर्मा मुख्य सिकंदरा चौराहे पर सड़क किनारे नमकीन का ठेला लगाते हैं। दोपहर तीन बजे से लेकर रात आठ बजे बजे तक नमकीन बेचने का समय रहता है।
महज 5 घंटे के समय में उनके ठेले से करीब 50 किलो नमकीन बिक जाती है। पंडितजी के ठेले पर रतलामी सेव, बीकानेरी भुजिया, लहसुन सेव, पपड़ी, मूंगफली, दाल, चेवड़ा, मैसूर की नमकीन सहित रायते के लिए बूंदी लोग बेहद पसंद करते हैं। नमकीन के साथ पंडितजी की घर पर बनी हुई मावे की शुद्ध गूंजी को भी लोग बेहद पसंद करते हैं।
दूर-दूर तक प्रसिद्ध है विजेंद्र गुर्जर का कलाकंद:
सिकंदरा गांव में पुराने पुलिस थाना भवन के सामने पिछले 10 वर्षों से विजेंद्र गुर्जर शुद्ध मावे का कलाकंद बना रहे हैं। विजेंद्र की दुकान से प्रतिदिन 60 किलो मावे का कलाकंद बिक जाता है। शुद्धता के कारण लोग विजेंद्र गुर्जर की कलाकंद बेहद पसंद करते हैं।
मोहनलाल की दाल पकौड़ी का जायका अलग ही है। सिकंदरा गांव मुख्य स्टैंड पर मोहनलाल विजयवर्गीय की दाल की पकौड़ी के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। वे पिछले 40 वर्ष से शुद्ध दाल की पकौड़ी बना रहे हैं। जिसे अलवर जयपुर सहित अन्य शहरों के लोग लेकर जाते हैं। शाम चार बजे से लेकर साढ़े छह बजे तक करीब 50 किलो दाल की पकौड़ी बनाते हैं। ग्राहकों को लाइन में लगकर पकौड़ी लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
Updated on:
03 Nov 2021 11:24 am
Published on:
03 Nov 2021 09:36 am
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