इस बार जून माह की शुरूआत में ही बारिश होने से किसानों में उम्मीद जगी थी कि अबकी बार उनकी खरीफ की फसल ठीक होगी। जिस पर किसानों ने खाद बीज का इंतजाम कर खेतों की जुताई व बुवाई भी कर दी थी, लेकिन आगे मानसून कमजोर होने और तापमान में कोई खास कमी न आने से बोई गई फसल भी खराब होने लगी है. किसान रामसिंह का कहना है कि खरीफ फसल की बुवाई में खाद, बीज मिलाकर करीब 40 से 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। शुरुआत में बारिश देख बुवाई भी जल्द कर दी थी। आगे एकदम सूखा पड़ जाएगा। इस नुकसान की भरपाई कैसे हो पाएगी। किसान रामखिलाड़ी के मुताबिक खेतों में बुवाई की थी, लेकिन बारिश न होने से मेहनत व लागत सब व्यर्थ गई। अभी भी बारिश का इंतजार है, यदि हो गई तो फसल सूखने से बच जाएगी, वरना भगवान ही मालिक है। अगली फसल करने की भी हिम्मत नहीं बचेगी।