जरुरतमंदों के लिए वरदान बनी युवा रक्तदाताओं की टीम

The team of young donors became a boon for the needy-ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं तो समिति के सदस्य करते हैं रक्तदान

By: gaurav khandelwal

Updated: 24 Aug 2020, 03:41 PM IST

दौसा. यदि किसी दुर्घटना में कोई व्यक्ति घायल हो जाए या किसी महिला को प्रसव के दौरान रक्त की जरुरत होने के बाद भी ब्लड डोनर की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो ऐसे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रही है जनसहयोग सेवा समिति के युवा रक्तदाताओं की टीम। किसी अनजान शख्स का जीवन बचाने के लिए भी टीम के सदस्य रक्त देने के लिए तत्पर रहते हैं। कई सदस्य तो एक से अधिक बार रक्तदान कर चुके है। कोरोनाकाल में समिति ने अन्य संस्थाओं के सहयोग से रक्तदान शिविर भी आयोजित आयोजित कराए हैं।

The team of young donors became a boon for the needy


टीम के भरत शास्त्री धरणवास बताते हैं कि करीब चार वर्ष पहले एक दुर्घटना में घायल होने पर रक्त के महत्व का पता चला। उसके बाद शुरू हुई रक्तदान की मुहिम अनवरत जारी है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए 1 दिसम्बर 2018 को जनसहयोग सेवा समिति नाम से एक व्हाट्सएप गु्रप बनाया गया। किसी जरुरतमंद को ब्लड की जरुरत होने के मैसेज पर सक्रिय होकर व्यवस्था करने की कोशिश करते हंै। ब्लड बैंक में कोई ब्लड गु्रप उपलब्ध नहीं होने पर उसी ब्लड ग्रुप का सदस्य रक्तदान करता है। इसके लिए सदस्यों के ब्लड गु्रप की लिस्ट बना रखी है। सदस्यों व अन्य युवाओं को प्रेरित कर रक्तदान कराया जाता है। उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग रक्तदान के लिए प्रेरित हो। अभी तक काफी संख्या में जरुरतमंद लोगों के लिए रक्तदान में भूमिका निभाई है।

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दौसा निवासी अरबाज खान ने बताया कि किसी प्रमाण-पत्र की अपेक्षा के बजाय लोग प्रेरित होकर रक्तदान करते हैं। रक्त देने व लेने वाले अधिकांश व्यक्ति के नाम-पते रखे जाते हैं। मनीष प्रजापत, अनिल नकवाल, अजय घूमणा, मोहन गोठड़ा, सुखदेव महावर, गिर्राज सैन, शशि जाटव, कुमेश मीना एवं बन्टी सैनी आदि सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। (ग्रामीण)

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बैंक में रक्त की कमी
कोरोनाकाल में जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक रक्त की कमी से जूझ रहा है। इससे कई मरीजों को मैच करने वाला ब्लड गु्रप उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उसी ब्लड गु्रप के डोनर होने पर ही ब्लड की व्यवस्था हो पा रही है। इससे मरीजों व उनके परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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gaurav khandelwal Desk
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