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बचपन न रहे अधूरा, आओ टीकाकरण करें पूरा

वर्तमान में देश के विकास के कितने ही दावे किए जा रहे हों, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह विकास हकीकत से कोसों दूर है।

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the vaccination message

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लालसोट. वर्तमान में देश के विकास के कितने ही दावे किए जा रहे हों, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह विकास हकीकत से कोसों दूर है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि गांव व ढाणियों में सरकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होना है। इसके चलते आज भी गांवों में महिलाओं के गर्भ धारण करने से लेकर प्रसव तक का अधिंकाश कार्य भगवान भरोसे ही चलता है। इसके चलते मातृ एवं शिशु मृत्यु दर थमने का नाम नहीं ले रही है।

इसी कमी को पूरा करने के लिए प्रदेश के चिकित्सा विभाग व यूनिसेफ ने स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर ग्रामीण इलाकों में जागरुकता अभियान चलाने का निर्णय किया है। इसको लेकर गुरुवार को उपखण्ड के डाबर कलां गांव में चिकित्सा विभाग एवं यूनिसेफ ने लोक सेवा संस्थान व जन कला साहित्य मंच के तत्वावधान में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्वयं सेवी संस्थाओं के नुक्कड़-नाटक कलाकारों ने ग्रामीणों को टीकाकरण सहित चिकित्सा विभाग की योजनाओं की जानकारी दी तथा नियमित रूप से टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया।

दोपहर करीब 12 बजे कलाकारों ने 'बचपन न रहे अधूरा, आओ टीकाकरण करें पूराÓ विषय पर नुक्कड़-नाटक प्रस्तुत किया। इसमें कलाकारों ने ग्रामीणों को टीकाकरण कराने का समय, उससे होने वाले लाभ व नुकसान की जानकारी दी।

इस दौरान कलाकारों ने टीकाकरण को लेकर ग्रामीणों में फैली भ्रांतियों को भी दूर किया। इस मौके पर यूनीसेफ के संभाग समन्वयक कमलेश बंसल ने कहा कि आज भी गंावों में टीकाकरण को लेकर काफी प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। ग्रामीणों को अपने बच्चों के निर्धारित समय पर टीका लगवाकर उनका जीवन सुरक्षित करना चाहिए। जिला प्रजनन एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.रामफल मीना ने कहा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है,जिस पर काबू पाया जाना जरुरी है।

लोक सेवा संस्थान के सचिव कल्याणसिंह कोठारी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में करीब चार लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित है। उनके परिजनों को जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ही टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कार्यशाला को राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजीव भानावत एवं एएनएम बिशनी मीना आदि ने भी सम्बोधित किया। (नि.प्र.)

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