6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पाले से सब्जी की फसलें चौपट, फलदार पौधों में भी नुकसान

फसलों पर जमा पाला

2 min read
Google source verification
पाले से सब्जी की फसलें चौपट, फलदार पौधों में भी नुकसान

कुण्डल में पाले की मार से खराब हुई फसल।

दौसा. नांगल राजावतान उपखंड मुख्यालय सहित आस-पास के गांव में दो दिन से पड़ रही कड़ाके की सर्दी से सब्जी की फसलें चौपट होने के साथ ही फलदार पौधों में भी नुकसान हो रहा है । किसान सोमप्रकाश स्वामी, रतनलाल मीणा आदि ने बताया कि दो दिन से पड़ रही तेज सर्दी के कारण टमाटर, बैंगन आदि की फसलें पाले से चौपट हो गई। फलदार पौधों में आंवला, पपीता , बेर में नुकसान होने से किसानों को चिंता बढ़ गई हैं। किसानों ने फसलों को पाले से बचाने के लिए शाम के समय खेत की मेड़ पर अलाव जलाकर धुंआ भी की, लेकिन सर्द हवा के साथ पाला अधिक पडऩे से फसलें नहीं बची।

कुण्डल. कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भी फसलों पर पाला जमने से बैंगन व हजारे की खेती में खासा नुकसान हुआ।
शनिवार सुबह भी खुले मैदानों, सोलर प्लांट, पेड़-पौधों के पत्तों, खेतों में खड़ी फसल पर सवेरे बर्फ की परत जमीं हुई देखी गई। कड़ाके की सर्दी से बचाव के लिए लोग देर तक घरों में गर्म कपड़ों में दुबके रहे।
किसान भवानीशंकर शर्मा ने बताया कि उसने मंहगें भाव का बीज लाकर हजारे के फूलों की खेती की थी, लेकिन पाले की मार ने पूरी फसल को तबाह करके रख दिया।
किसान भगवत प्रसाद शर्मा ने बताया कि उन्होने जयुपर से महंगी दर पर बीज लाकर बैंगन की खेती की थी, लेकिन पिछले दो दिन से लगातार पाले की मार के चलते फसल खराब हो गई। किसानों ने बताया कि मुनाफा तो दूर फसल की बुवाई में लगाई गई लागत जितनी भी पैदावार नहीं हुई। उससे पहले ही पाले की मार ने सबकुछ तबाह करके रख दिया।

शेरसिंह रजवास (लवाण ). तहसील क्षेत्र में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की सर्दी के कारण शेरसिंह रजवास गांव में करीब 60 बीघा ख्ेात में उगी टमाटर की फसल पाला के पडऩे से बेकार हो गई। इससे किसानों के समक्ष अब रोजी-रोटी का संकट हो गया है। किसान रामूलाल सैनी ने बताया कि कुओं में जल स्तर के नीचे चले जाने से खेती करना मुश्किल हो रहा था। कम पानी में खेती का रूख बदलकर टमाटर की खेती की। रोजाना छह ट्रकों में करीब तीन हजार कैरेट टमाटर भरकर दिल्ली, हरियाणा और चड़ीगढ़ भेजे जाते थे। वहां भाव भी अच्छा लगता था, लेकिन दो दिन के पाले ने सारी टमाटर की फसल को बर्बाद कर दिया। किसानों ने बताया कि पाले के एक साथ गिरने से फसल बचाने का समय ही नहीं मिला।