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जर्जर क्वार्टर में रहते “रक्षक”

बारिश के दिनों में स्टेशन पर कटती रातें, चौकी भवन की दीवारों से गिरता चूना, चहुंओर उगे जंगल पेड़-पौधे तथा हर पर रहता हादसे का भय। यह हालत है ट्रेनों

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Kamal Singh Rajpoot

Aug 31, 2015

Dausa news

Dausa news

दौसा। बारिश के दिनों में स्टेशन पर
कटती रातें, चौकी भवन की दीवारों से गिरता चूना, चहुंओर उगे जंगल पेड़-पौधे तथा हर
पर रहता हादसे का भय। यह हालत है ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे स्टेशन
पर अपराधों की रोकथाम तथा अपराधियों पर नजर रखने के लिए दौसा रेलवे स्टेशन पर
संचालित जीआरपी की अस्थाई चौकी पर तैनात जवानों की। ये जवान मौत के मुंह में रहकर
रेलवे सम्पत्ति व यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रहे हैं।

जीआरपी
की ओर से इन जवानों के रहने के लिए भवन की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण ये जवान
रेलवे के जीर्ण-शीर्ण क्वार्टर में रहने को मजबूर हैं। खास बात यह है कि रेलवे ने
इस क्वार्टर को सालों पूर्व ही कंडम घोषित कर दिया। ऎसे में यह क्वार्टर कभी भी
धराशायी होकर दुर्घटना का कारण बन सकता है। इस क्वार्टर की छत व दीवारो में जगह-जगह
दरारें आ रही है तथा जगह-जगह से चूना गिरता है। क्वार्टर के जमीन के तल से नीचे
होने के कारण बारिश में कमर तक पानी भरता है। इसमें ना तो बिजली की व्यवस्था है और
ना ही पानी की। इससे यहां तैनात जवान नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

साढ़े
चार वर्ष से हैं संचालित
दौसा रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ट्रेन व स्टेशन पर
अपराधों में बढ़ोत्तरी होने से जीआरपी पुलिस अधीक्षक ने वर्ष 2008 में यहां दो
प्रहरी तैनात करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जीआरपी बांदीकुई थानाप्रभारी ने दो
शिफ्टों में यहां पुलिसकर्मी तैनात कर दिए। दो वर्ष तक यही स्थिति चलती रही। इसके
बाद वर्ष 2011 में जीआरपी प्रशासन ने अस्थाई चौकी संचालित करने के निर्देश दे दिए,
लेकिन भवन सुविधा नहीं दी। इस पर पहले तो प्रहरी स्टेशन पर ही रात गुजारकर ड्यूटी
देते रहे, लेकिन जवानों की परेशानी को देखते हुए स्टेशन प्रशासन ने उन्हें एक कंडम
क्वार्टर आवंटित कर दिया। उसके बाद से ही जीआरपी के जवान इसी कंडम क्वार्टर में
दुर्घटना के खतरे के बीच यात्री व ट्रेनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
भवन के सम्बन्ध में थानाप्रभारी की ओर से कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के
बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बारिश में प्लेटफॉर्म पर आसरा
कंडम
क्वार्टर के जमीन के तल के नीचे स्थित होने के कारण बारिश के दिनों में इस क्वार्टर
में कमर तक पानी भर जाता है। ऎसे में अस्थाई तौर पर तैनात जवानों को प्लेटफॉर्म पर
सोकर रात गुजारनी पड़ती है। इसके अलावा पानी भरने से जवानों का क्वार्टर मे रखा
सामान भी खराब हो जाता है। कईबार तो दिनभर ड्यूटी कर थके हुए जवान को पूरी रात
जागकर निकालनी पड़ती है, लेकिन जवानों की इस पीड़ा की ओर किसी का ध्यान नहीं है।


कर चुके हैं मांग
अस्थाई चौकी के लिए मण्डल रेल प्रबंधक से कई बार भवन
की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ। कंडम क्वार्टर में रहने से
जहां जवानों की सुरक्षा को खतरा है, वहीं सुविधाओं का भी अभाव है। मालीराम
थानाप्रभारी जीआरपीथाना, बांदीकुई

चहुंओर गंदगी का आलम
क्वार्टर के
आस-पास कचरों के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा खाली पड़े स्थान में पर लोग खुले में
शौच व पेशाब भी जाते हैं। इसके बाद क्वार्टर क्षेत्र की सफाई नहीं कराई जाती है।
गंदगी से उठती दुर्गन्ध के कारण जवानों का क्वार्टर में आधा घंटे रूकना भी मुश्किल
होता है। इसके अलावा जवान रात में भी मुंह पर कपड़ा बांधकर सोते
हैं।

जहरीलेकीटों का भी रहता है खतरा
क्वार्टर के स्टेशन परिसर से बाहर
खाली जगह में स्थित होने तथा आस-पास जंगली पौधे उगे होने के कारण जवानों में जहरीले
कीटों के आने का भी डर बना रहता है। चौकी पर तैनात जवान रामेश्वर व महेन्द्र व्यास
ने बताया कि रात में कईबार क्वार्टर में सांप, गोहरा व बिच्छु आ गए, लेकिन समय रहते
पता लगने से हादसा टल गया।