21 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हरिद्वार में बनेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट! ऊधमसिंह नगर का प्रस्ताव खारिज, जानें क्या होंगे लाभ

सकता है। इससे पूर्व इसके लिए यूएस नगर में भूमि चिह्नित की गई थी, जिसे तकनीकी कारणों से निरस्त कर दिया गया है। इसी को देखते हुए अब हरिद्वार जिले में संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।

2 min read
Google source verification
Preparations are underway to build a nuclear power plant in Haridwar, Uttarakhand

न्यूक्लियर पावर प्लांट का प्रतीकात्मक फोटो

Nuclear Power Plant in Uttarakhand : उत्तराखंड का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट हरिद्वार में स्थापित हो सकता है। बता दें कि इससे पूर्व इस प्लांट के लिए यूएस नगर जिले के नेपा फार्म समेत आसपास के इलाकों में जमीनें चिह्नित की जा रही थी। जांच में ये जमीनें न्यूक्लियर प्लांट के लिए अनुकूल नहीं पाई गई हैं। अब हरिद्वार बुग्गावाला क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने हर राज्य को अपने यहां एक-एक न्यूक्लियर पावर प्लांट की संभावनाओं को तलाशने को कहा था। इसके बाद शासन की ओर से जिलों से उत्तराखंड के पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मांगे गए थे। सबसे पहले यूएसनगर की ओर से 90 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव दिया गया। इस जमीन के बीच में से रेलवे ट्रेक निकलने के कारण न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने जमीन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। इधर, यूएसनगर में संभावनाएं समाप्त होने के बाद अब हरिद्वार बुग्गावाला क्षेत्र समेत आस पास के दूसरे क्षेत्रों में जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है।

300 एकड़ भूमि की दरकार

इस प्लांट के लिए न्यूनतम 300 एकड़ भूमि चाहिए। राज्य सरकार की ओर से भूमि चयनित किए जाने के बाद न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन की ओर से जमीन का परीक्षण किया जाएगा। केंद्र की मंजूरी के बाद बात आगे बढ़ेगी। प्रमुख सचिव ऊर्जा मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक यूएसनगर वाली जमीन को न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने निरस्त कर दिया है। जमीन को तकनीकी कारणों से सही नहीं माना गया है। अब हरिद्वार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

नेताओं, नौकरशाहों का बड़ा ठिकाना

हरिद्वार का बुग्गावाला क्षेत्र उत्तराखंड और यूपी के नेताओं, नौकरशाहों के निवेश का बड़ा ठिकाना है। यहां बड़े पैमाने पर जमीनों में निवेश किया गया है। बताया जाता है कि कुछ ही सालों में यहां जमीनों के रेट एक लाख रुपए बीघा से बढ़ कर 50 लाख रुपए बीघा तक पहुंच गए हैं। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनने के बाद रियल स्टेट सेक्टर में सबसे अधिक बूम पिछले कुछ सालों में इसी क्षेत्र में आया है।

बिजली उत्पादन में होगी बढ़ोत्तरी

न्यूक्लियर पावर प्लांट से एक हजार मेगावाट से अधिक बिजली तैयार होने से उत्तराखंड पावर सरप्लस राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड न सिर्फ अपनी बिजली जरूरतों को पूरा कर पाएगा, बल्कि देश की बिजली जरूरतों को भी पूरा कर सकेगा। अभी राज्य की पीक टाइम में बिजली की मांग 2700 मेगावाट प्रतिदिन है। कई बार बिजली संकट भी यहां देखने को मिलता है। पावर प्लांट बिजली की दिशा में यह मील का पत्थर साबित हो सकता है।