
राज्य कर विभाग की टीम ने सितारगंज में बड़ी कर चोरी का खुलासा किया
Major Operation : आधुनिक एआई की मदद से राज्य कर विभाग की टीम ने उत्तराखंड के सितारगंज की एक फैक्ट्री में 150 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का मामला पकड़ा है। राज्य कर आयुक्त सोनिका के निर्देशन में हल्द्वानी संभाग के 32 अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों की तीन टीमों ने बीते बुधवार को दोपहर करीब तीन बजे सितारगंज स्थित कंपनी के कारखाने और कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की। करीब आठ घंटे तक टीमों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। इस दौरान टीमों ने बिक्री, स्टॉक, वित्तीय लेनदेन और खरीद से संबंधित कई संदिग्ध दस्तावेज खंगाले। जांच पूरी होने तक 76 करोड़ रुपये के स्टॉक को सीज किया गया। पड़ताल में सामने आया कि कंपनी ने एनसीएलटी के माध्यम से डिमर्जर किया था। 6-7 महीनों से कंपनी पोर्टल पर शून्य बिक्री दिखा रही थी। बैंक ट्रांजेक्शन में करोड़ों का लेनदेन पकड़ा गया। कारखाने से भारी मात्रा में जाली बिक्री चालान बरामद होने से हड़कंप मच गया। कर विभाग की टीम ने कंपनी प्रबंधन से 20 करोड़ की वसूली की, जो बड़ा रिकॉर्ड है।
कर चोरी का खुलासा होने से हड़कंप मचा हुआ है। दोपहर तीन बजे जब 32 अधिकारियों की तीन टीमें कारखाने में दाखिल हुईं तो अफरा-तफरी मच गई। जांच शुरू हुई तो अलमारियों से फर्जी बिलों और जाली चालानों का अंबार निकलने लगा। रात 11 बजे तक चले इस ऑपरेशन के आगे कंपनी प्रबंधन पूरी तरह पस्त हो गया। कंपनी दक्षिण भारत से कच्चा माल मंगाकर यूपी, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बिजली उपकरणों की सप्लाई कर रही थी। कागजों में इसे छिपाया गया। बिजली विभागों को हुई आपूर्ति के बिलों में हेरफेर पकड़ी गई है।
जीएसटी अधिकारियों ने अनोखे तरीके से कार्रवाई करते हुए करोड़ों की कर चोरी का खुलासा किया है। एआई की मदद से डमी कंपनी बनाकर जीएसटी अफसरों ने टैक्स चोरी कर रही फर्म से संपर्क साधा। कंपनी के साथ कारोबारी रिश्ते बनाए और फिर छापेमारी कर राज्य की सबसे बड़ी कर चोरी का खुलासा किया। जीएसटी कुमाऊं क्षेत्र के विशेष जांच ब्यूरो के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल के मुताबिक कुछ महीने पहले सितारगंज की कंपनी के खिलाफ कर चोरी की जानकारी मिली थी। कंपनी ट्रांसफॉर्मर और बिजली उपकरणों की आपूर्ति का कारोबार करती है। बुधवार को यहां करीब 150 करोड़ के टर्नओवर में कर चोरी पकड़ी गई।विभाग के दो युवा सहायक आयुक्त आयुषी अग्रवाल और उज्ज्वल डालाकोटी, जो एनआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। दोनों ने इस ऑपरेशन के ‘मास्टरमाइंड’ रहे। उन्होंने टैक्सी चोरी कर रही कंपनी के काम करने के तरीके को समझने के लिए एक ‘डमी कंपनी’ बनाई। एआई टूल्स व फॉरेंसिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया।
Published on:
20 Mar 2026 08:16 am
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