
आरती लिखने का दावा कर फखरूद्दीन कहलाए बदरूद्दीन, जबकि 1881 में इन्होंने लिखी थी बद्री विशाल की आरती
(देहरादून,हर्षित सिंह): सैकड़ों वर्ष पुरानी मान्यता को नकारते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ( Chief Minister Trivendra Singh Rawat ) ने आज बद्री विशाल की आरती ( Badri Vishal Ki Aarti ) के रचयिता फखरूद्दीन की जगह धन सिंह के नाम पर मुहर लगा दी।
मीडिया से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री ( Uttarakhand CM ) ने आज कहा कि स्व. धन सिंह बर्थवाल ( Dhan Singh Barthwal ) के यहां पांडुलिपि मिली। इसकी हस्तलिपि की कालावधि कार्बन डेटिंग टेस्ट के आधार पर तय हुई है। यह आरती लिखे जाने के समय से मिलती है, इसलिए हम मानते हैं यह आरती धन सिंह बर्थवाल ने लिखी है।
मान्यता है कि चमोली के नंदप्रयाग के एक पोस्टमास्टर फखरूद्दीन सिद्दीकी ( Fakhruddin Siddiqui ) ने वर्ष 1860 में यह आरती लिखी थी। भगवान बद्रीनाथ ( Bhagwan Badrinath ) का भक्त होने के कारण सिद्दीकी को सभी बदरूद्दीन बुलाते थे। बद्दरूद्दीन के पोते अयाजुद्दीन ने दावा किया कि फखरूद्दीन ही आरती के असली रचनाकार हैं।
दूसरी तरफ सरकार का दावा है कि आरती, स्थानीय लेखक धन सिंह बर्थवाल ( Dhan Singh Barthwal ) ने लिखी है। स्व. धन सिंह के परपोते महेंद्र सिंह बर्थवाल हाल ही में प्रशासन के पास आरती की हस्तलिपि लेकर पहुंचे। हस्तलिपि की कार्बन डेटिंग टेस्ट के बाद पता चला कि यह लगभग वर्ष 1881 की है। इस दौरान बदरीनाथ में आरती ( Badri Vishal Ki Aarti ) की परंपरा शुरू हुई थी। वहीं बदरूद्दीन के परिवार के पास ऐसा कोई सबूत नहीं हो पाने के कारण बर्थवाल के दावों को सच मान लिया गया। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ( Uttarakhand CM ) ने कहा कि आज से सैकड़ों साल पहले हमारे पूर्वज हस्तलिपि संभाल कर रखते थे, इससे साफतौर पर साबित होता है कि वह उस समय भी जागरूक थे। इस दौरान बर्थवाल परिवार ने सीएम को हस्तलिपि की फोटो प्रति भेंट की।
जानकारी के मुताबिक अल्मोड़ा के एक संग्रहालय में वर्ष 1889 में प्रकाशित किताब में यह आरती है। इस संग्रहालय के मालिक जुगल किशोर पेठशाली ने अल – मुश्तहर मुंशी नरीरूद्दीन को किताब का संरक्षक बताया है। यह किताब हिंदू धर्म शास्त्र स्कंद पुराण का अनुवाद है और इसके आखिरी पन्ने में आरती लिखी है। इस पर आईआईटी रूड़की के एसोसिएट प्रोफेसर एएस मौर्य ने कहा कि कार्बन डेटिंग से एकदम सही समय का पता लगाना संभव नहीं है। यहां तक कि असली समय डेटिंग टेस्ट के नतीजे में 50 साल तक का अंतर हो सकता है। उन्हेंने कहा कि जरूरी नहीं की बर्थवाल की हस्तलिपि 1881 में लिखी गई हो। वहीं कार्बन डेटिंग टेस्ट करने वाले उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर निदेशक एमपीएस बिष्ट का दावा है कि टेस्ट के नतीजे बिल्कुल सही हैं। हांलाकि मुख्यमंत्री के धन सिंह को आरती के रचनाकार मान लेने से विवाद और गहराने कि संभावनाएं बढ़ गई हैं।
Published on:
22 Jun 2019 07:57 pm
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