
जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का बायलॉज तैयार करने के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम में हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 में जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का गठन हुआ था। बावजूद इसके अब तक प्रबंधन समिति का बायलॉज नहीं बन पाया है। नियमावली स्पष्ट न होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने मंदिर समिति का बायलॉज तैयार करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को एसडीएम एनएस नगन्याल ने तहसील परिसर में जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति का बायलॉज तैयार करना है। बैठक में तहसीलदार बरखा जलाल, उपाध्यक्ष नवीन चंद्र भट्ट, पुजारी प्रतिनिधि पंडित नवीन चंद्र भट्ट, प्रबंधक ज्योत्सना पंत, पंडित हेमंत भट्ट, पंडित शुभम भट्ट, पंडित तारा दत्त भट्ट, पंडित भगवान भट्ट पंडित आनंद भट्ट आदि मौजूद रहे।
मांगे जाएंगे सुझाव
बायलॉज का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए पुजारी प्रतिनिधि और प्रबंधक ने सुझाव दे दिए हैं। अब मंदिर समिति उपाध्यक्ष सहित पुजारियों से भी सुझाव मांगे जाएंगे। उसके बाद प्रशासन सुझावों को कंपाइल करेगा। उसके बाद पुजारियों और समिति सदस्यों से आपत्तियां भी मांगी जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद बायलॉज तैयार हो जाएगा।
प्रबंधक ने ये दिए प्रमुख सुझाव
-दानपात्र से अर्जित धनराशि से पुजारियों को अप्रैल से अगस्त तक 50 प्रतिशत जबकि सितंबर से मार्च तक 30 प्रतिशत अंशदान दिया जाएगा।
-पुजारियों द्वारा मंदिर समूह में किए गए जाप, हवन और कालसर्प योग पूजन का 70 प्रतिशत दिया जाएगा।
-बाहरी पुजारियों द्वारा मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने पर बारीदार पुजारी के अंशदान में कटौती की जाएगी।
-पुजारी धोती और कुर्ता पहनकर ही मंदिर आएंगे, ऐसा न करने पर जुर्माना लगेगा।
-बारीदार पुजारियों के अलावा मंदिर परिसर में अन्य पुजारियों का घूमना और बैठना सख्त प्रतिबंधित होगा।
-जागेश्वर मंदिर समूह में पूजाओं के बाद स्थल की पूर्ण सफाई की जिम्मेदारी पूजाकर्ता की होगी।
-मंदिर परिसर में कलावा बांधना प्रतिबंधित होगा। भौतिक पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को कलावा पूजाकर्ता पुजारी ही बांधेंगे।
पुजारी प्रतिनिधि के प्रमुख सुझाव
-मंदिर ट्रस्ट केवल आंतरिक प्रबंधन का कार्य करेगा, मंदिर परिसर के बाहर के कार्यों पर हस्तक्षेप नहीं करेगी।
-किसी भी प्रकार के निर्णय के लिए प्रबंधन समिति को समस्त सदस्यों की लिखित सहमति अनिवार्य रूप से लेनी होगी।
-मंदिर में पुजारी समुदाय से संबंधित समस्त प्रकरणों पर पुजारी प्रतिनिधि की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।
-नए पुजारियों को आवेदन के बाद 15 दिन के भीतर हर हाल में सूचीबद्ध करना होगा।
-मंदिर की व्यवस्थाओं में बाहरी व्यक्तियों और राजनेताओं का दखल रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।
-बैठकों की सूचना कम से कम एक सप्ताह पूर्व ही समिति सदस्यों को देनी होगी।
Published on:
15 Feb 2024 08:08 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
