
वेतन आयोग की टीम ने उत्तराखंड में कर्मचारियों की मन की थाह लेना शुरू कर दिया है
Eighth Pay Commission : आठवें वेतन आयोग ने केंद्र और राज्य कर्मियों की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है। देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक होटल में वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन आदि अधिकारियों के सामने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सातवें वेतनमान की विसंगतियों को गिनाया। आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई भी ऑनलाइन जुड़ीं। कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही केंद्र-राज्य के बीच सुविधाओं के अंतर को समाप्त करने की मांग उठाई। कर्मचारियों ने नई पेंशन योजना के साथ ही यूपीएस को नुकसानदायक बताया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अरुण पांडेय ने एक राष्ट्र एक वेतन एक पेंशन नीति लागू करने पर जोर दिया। कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले उत्तराखंड राज्य में पर्वतीय विकास भत्ता एक तय राशि के बजाय बेसिक पे का 10 से 15 प्रतिशत तय किया जाना चाहिए। अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों के लिए विशेष कठिन सेवा भत्ता देने के साथ ही बच्चों के लिए हॉस्टल सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।
उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बलवीर सिंह नेगी, महासचिव रवीन्द्र दत्त सेमवाल ने कहा कि महंगाई, चिकित्सा व्यय और आवास लागत के कारण पेंशनरों के लिए सम्मानजनक जीवन यापन कठिन होता जा रहा है। वन रैंक वन पेंशन लागू करने, फिक्स मेडिकल एलाउंस को चार हजार रुपये करने, पेंशनर को आवासीय सुविधा, डीआर को महंगाई से जोड़ने, 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को सुपर सीनियर का दर्जा देने और देश भ्रमण व तीर्थ यात्रा योजना लागू करने की मांग भी रखी।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने दोपहर आयोग की टीम के समक्ष राज्य की माली हालत, चुनौतियों का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राजस्व सरप्लस राज्य है। इससे इस वर्ष से उसे राजस्व घाटा अनुदान मिलना बंद हो गया है। आयोग के सचिव पंकज जैन ने वित्त सचिव से छठे और सातवें वेतनमान की वजह से राज्य पर प्रभाव की जानकारी भी ली। केंद्रीय कर्मचारियों के समान कैशलेस इलाज की सुविधा, सीजीएचएस की तर्ज पर कैशलेस, फ्री हेल्थ सुविधा दी जाए। महंगाई भत्ते और चिकित्सा प्रतिपूर्ति को आयकर से मुक्त रखा जाए। ताकि बढ़ती महंगाई में कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके।
वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारियों ने 10, 20, 30 वर्ष की सेवा अवधि पर एसीपी के बजाय पुरानी सात, 14 और 21 वर्ष में एसीपी लाभ देने की व्यवस्था लागू की जाए। नई व्यवस्था में कई कर्मचारी बिना प्रमोशन और बिना पदोन्नत वेतनमान के ही रिटायर हो रहे हैं। जो कर्मचारियों के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान है। ग्रेड पे 1800 को समाप्त किया जाए। इसके स्थान पर न्यूनतम ग्रेड पे 2000 तय किया जाए। ग्रेड-पे 4600 और 4800 के पदों का मर्जर किया जाए। 65 वर्ष की आयु से ही पेंशन में पांच प्रतिशत की क्रमिक वृद्धि और पेंशन कम्यूटेशन की वसूली समय 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष किया जाए।
Published on:
25 Apr 2026 08:04 am
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