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बिना मंजूरी दफ्तरों में प्रवेश निषेध, अफसरों की टेबिल पर लगेंगे पैनिक बटन, वीडियोग्राफी पर भी रोक

SOP : सरकारी दफ्तरों में बगैर मंजूरी के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। लोगों को सरकारी दफ्तर जाने के लिए सक्षम अधिकारी से इजाजत लेनी होगी। इसके अलावा दफ्तरों में वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी रोक लगा दी गई है। अफसरों की सुरक्षा के लिए उनके टेबल के नीचे पैनिक बटन भी लगाया जाएगा। मुख्य सचिव ने एसओपी जारी कर दी है।

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The Chief Secretary has issued a new SOP regarding entry into government offices in Uttarakhand

भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी

SOP : सरकारी कार्यालयों में अनुमति बगैर अब परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। बता दें कि बीते दिनों देहरादून में बेसिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल को भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों ने दफ्तर में घुसकर पीट दिया था। इस घटना से पूरे राज्य में हंगामा मचा हुआ है। शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों ने घटना के विरोध में हड़ताल और प्रदर्शन भी किए। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा के लिए एसओपी जारी करने की मांग उठाई थी। इसी को देखते हुए मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने कल एसओपी जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद करने के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं। इसमें अफसर से मिलने के लिए आने वाले लोगों की संख्या तक तय कर दी गई है। सरकारी कार्यालय में अफसरों से मिलने को पहले से समय लेना होगा। साथ ही अधिकारी से मिलने के लिए एक बार में सिर्फ दो लोग ही जा पाएंगे। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मामले में अधिकतम तीन लोग मिल पाएंगे।

नारेबाजी, शोर शराबे पर प्रतिबंध

मिलने के लिए आने वालों की संख्या अधिक होने पर अफसर अपने कक्ष के बजाय सभा कक्ष या कॉन्फ्रेंस हॉल में मुलाकात करेंगे, जहां सीसीटीवी कैमरा लगा होगा। सरकारी दफ्तर में नारेबाजी, शोर-शराबा और उत्तेजक व्यवहार पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। एसओपी के दायरे में आमजन, जनप्रतिनिधि, उनके समर्थक और निजी सुरक्षाकर्मी तथा ठेकेदार होंगे। नई एसओजी के अनुसार वीआईपी भी अपने साथ सुरक्षाकर्मी लेकर अफसर से मिलने नहीं जा पाएंगे। सुरक्षाकर्मी को अपने शस्त्र रिसेप्शन पर दर्ज करवाकर वेटिंग रूम में रुकना होगा। दफ्तरों में ज्वलनशील पदार्थ, हथियार, लाठी-डंडा, स्याही आदि वस्तुएं नहीं ले जा पाएंगे। ऑफिसों में निजी एजेंसियों के सुरक्षागार्ड भी सचिव की अनुमति के बाद ही तैनात होंगे।

साइलेंट पैनिक बटन से बजेगा अलार्म

सरकारी कार्यालय में अधिकारियों की मेजों पर अब पैनिक बटन लगेंगे। हमला होने या आपातकाल की स्थिति में अधिकारी साइलेंट पैनिक बटन का प्रयोग कर सकेंगे। साथ ही विस्तृत पहचान के लिए कार्यालय में लगी सीसीटीवी फुटेज लोकल सर्वर पर तीन महीने तक सुरक्षित रखी जाएगी। सरकारी दफ्तर में दुर्व्यवहार की घटना पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा। घटना से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए घटनास्थल को सील किया जाएगा। साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो, इसकी भी व्यवस्था की जाएगी। ऐसे मामलों की जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी ही करेंगे। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी शिष्ट भाषा का प्रयोग करेंगे। सभी स्थायी और संविदा कर्मचारियों को टैंपर-प्रूफ प्रमाणित पहचान पत्र रखना जरूरी होगा। सरकारी दफ्तरों में बाहरी लोग बिना अनुमति किसी भी तरह का वीडियो रिकॉर्ड नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। साथ ही कार्यालय परिसरों में सीसीटीवी अनिवार्य रूप से लगेंगे।

विधायक ने माफी मांगी

बेसिक शिक्षा निदेशक से मारपीट के मामले में रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने मीडिया के समक्ष आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने मारपीट की घटना पर अफसोस जताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। विधायक की माफी और दफ्तरों की सुरक्षा के लिए एसओपी जारी होने के बाद तीन दिन से चल रही कर्मचारियों की हड़ताल स्थगित हो गई है। भाजपा महानगर कार्यालय में महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल की मौजूदगी में इस घटना का जिक्र करते हुए रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने बताया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। उन्होंने ये भी कहा कि वह जनहित के कार्यों में हमेशा कर्मचारी-अधिकारियों का सहयोग मिलता रहा है। उन्होंने भी उचित सम्मान दिया है। इसलिए शनिवार की घटना पर उन्हें अफसोस है। जिसके लिए वह सम्बंधित पक्ष से माफी मांगते हैं।