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156 लोगों की अस्थियां लेकर ह​रिद्वार पहुंचा रावण, दिल छू जाएगी राजस्थान के इस शख्स की कहानी

लंकापति रावण का वेष धारण कर हरिद्वार गंगा में अस्थियां विसर्जित करने आया एक शख्स कौतुहल का विषय बन गया है। जयपुर के इस शख्स की कहानी लोगों के दिलों को छू रही है।

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राजस्थान के जयपुर से आए कर्मयोगी रावण ने हरिद्वार में अस्थि विसर्जन किया

रावण का रूप धारण किये राजस्थान के कोटा की रामलीला के एक कलाकार को गंगा तट पर 156 लावारिश लोगोंं की अस्थियों का विसर्जन करता देख लोग चकित हो गए थे। राहगिर ठहर कर एक बार उसे निहारते नजर आ रहे थे। राजस्थान के जयपुर से रावण के वेष में आए इस कर्मयोगी दशानन ने गंगा में 156 लावारिश मृतकों की अस्थियां विसर्जित की। उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। उनकी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

छह हजार लोगों की अस्थियां कर चुके हैं विसर्जित
राजस्थान के कोटा की रामलीला में रावण का अभिनय कर दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ने वाले राजा राम जैन 2006 से लावारिश लोगों की अस्थियों का हरिद्वार गंगा में विसर्जन कर रहे हैं। अब तब वह 25 बार में छह हजार से अधिक लावारिश मृतकों की अस्थियों का गंगा में विसर्जन कर चुके हैं।

रावण के पात्रों से अयोध्या परिक्रमा का लक्ष्य
राजा राम जैन ने कहा कि देश भर में रामलीला में रावण का रोल निभाने वाले पात्रों को एकत्र कर अयोध्या में राम मंदिर की परिक्रमा करना उनका लक्ष्य है। कहा कि लोग रावण को अनादर और अत्याचारी के रूप में देखते हैं। इसलिए वह रावण के सभी पात्रों को एकत्र कर अयोध्या परिक्रमा कराना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वह 1994 से राष्ट्रीय दशहरा मेला कोटा की रामलीला में अभिनय कर रहे हैं।

मिली है कर्मयोगी रावण की उपाधि
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के मेले में सरकार ने उन्हें कर्मयोगी रावण की उपाधि दी है। बताया कि उनकी पत्नी अल्का दुलारी जैन कर्मयोगी दस्ताना कठपुतली का आयोजन करती हैं। कई देशों में उनकी पत्नी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।