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Uttarakhand Literacy: उत्तराखंड को मिला पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने दी मंजूरी

Literacy in Uttarakhand: उत्तराखंड राज्य को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड) ने प्रदेश को पूर्ण साक्षर घोषित करने को मंजूरी दी है।
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Uttarakhand Literacy

सांकेतिक इमेज- पत्रिका

उत्तराखंड राज्य पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड) ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के मानकों को पूरा करने के बाद उत्तराखंड यह उपलब्धि हासिल करने वाला राज्य बना है।

उत्तराखंड ने पूरे किए NEP-2020 के मानक

केंद्र सरकार ने NEP-2020 के तहत साक्षरता की परिभाषा को व्यापक बनाया है। अब केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि समझ के साथ पढ़ना, लिखना, गणित की क्षमता, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय साक्षरता को भी साक्षरता का हिस्सा माना जाता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वृद्धावस्था, गंभीर बीमारी या बौद्धिक अक्षमता के कारण शत-प्रतिशत साक्षरता संभव नहीं होती। इसलिए 95 प्रतिशत या उससे अधिक साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता का मानक तय किया गया है। उत्तराखंड ने इस मानक को पार करते हुए 98.7 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल की है।

उल्लास कार्यक्रम से निरक्षरों की पहचान

उत्तराखंड में ‘उल्लास’ (Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत निरक्षर व्यक्तियों की व्यापक पहचान की गई। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के निर्देशन में विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। वर्ष 2025 में पूरे राज्य में साक्षर और निरक्षर आबादी का सटीक आकलन किया गया। इस सर्वे के अनुसार 7 वर्ष से अधिक आयु की राज्य की कुल आबादी लगभग 1 करोड़ 23 लाख 46 हजार है।

क्या हैं पूर्ण साक्षरता के मानक?

केंद्रीय मानकों के अनुसार पूर्ण साक्षरता के लिए निरक्षरों की संख्या 5 लाख 11 हजार 731 से कम होनी चाहिए थी, लेकिन उत्तराखंड के वास्तविक सर्वे में केवल 1 लाख 31 हजार 986 व्यक्ति ही निरक्षर पाए गए। वर्ष 2023-24 में उत्तराखंड की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी।

मात्र दो वर्षों में इसमें 14.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बेहद सराहनीय है। इस उपलब्धि से राज्य शिक्षा क्षेत्र में नई मिसाल कायम हुई है। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने इस उपलब्धि पर राज्यवासियों को बधाई दी और कहा कि यह शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अधिकारियों का कहना है कि अब लक्ष्य निरक्षर बचे हुए लोगों को भी मुख्यधारा में लाकर साक्षरता को और मजबूत बनाना है।

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