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आपदा को बनाया अवसर, जुगाड़ लगाकर अभ्यास कर रहे तीरंदाज, खेत-खलिहान बने प्रैक्टिस सेंटर, पढ़ें प्रेरक वाक्या

बाधाएं भारतीय खिलाड़ियों के जज्बे को कम नहीं कर पाई हैं (National Archery Players Practicing At Home By Jugad In Ranchi Jharkhand) (Jharkhand News) (Deoghar News) (Ranchi News) (Positive Story) (How To Practice Archery At Home)...  

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आपदा को बनाया अवसर, जुगाड़ लगाकर अभ्यास कर रहे तीरंदाज, खेत-खलिहान बने प्रैक्टिस सेंटर, पढ़ें प्रेरक वाक्या

आपदा को बनाया अवसर, जुगाड़ लगाकर अभ्यास कर रहे तीरंदाज, खेत-खलिहान बने प्रैक्टिस सेंटर, पढ़ें प्रेरक वाक्या

(रांची,देवघर): Coronavirus महामारी के दौर में हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है तो खेल जगत इससे कैसे अछूता रह सकता है? किसी भी तरह की टूर्नामेंट आयोजित नहीं हो रही हैं वहीं खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सेंटर भी नहीं खुल पाए हैं। लेकिन यह सभी बाधाएं भारतीय खिलाड़ियों के जज्बे को कम नहीं कर पाई हैं। कोई संसाधान नहीं होने पर भी झारखंड के राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजों ने घर पर ही अपने अभ्यास को जारी रखा है।

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जी हां, समस्याओं को किनारा कर हमारे खिलाड़ी अपने अभ्यास में जुटे हुए हैं। झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 35 किलोमीटर दूर कोइनारडीह गांव में तीरंदाजी में नेशनल गोल्ड मेडल हासिल करने वाली सावित्री कुमारी रहती हैं। इस इलाके में ख्याती प्राप्त अन्य कई खिलाड़ी भी रहते हैं। इनमें निशा कुमारी समेत अन्य लोग शामिल हैं।

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कोरोना के कहर बरसाने के बाद राज्य में खेल गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया। यहां तक की राज्य सरकार द्वारा संचालित आवासीय व डे बोर्डिंग सेंटर भी बंद कर दिए गए। खिलाड़ियों के लिए यह सब बड़ी परेशानी का सबब बन गया। घरों में कैद हुए खिलाड़ियों में इस आपदा को अवर बनाने की सोची और घर पर ही जुगाड़ के सहारो अपनी तीरंदाजी को चालू रखा। एसजीएफआइ नेशनल तीरंदाजी (2019) अंडर-19 में एक स्वर्ण व तीन रजत पदक जीत चुकी सावित्री कुमारी ने यह तरीका इजाद किया। बाद में अन्य खिलाड़ियों ने भी इसे अपना लिया। टाट की बोरी को लपेटकर, उसे लकड़ी के सहारे टांग कर यह बेटियां घर के आंगन व खेतों में अपने तीर दाग रही हैं। बोर्डिंग आर्चरी सेंटर जोन्हा (रांची) के कोच रोहित अभ्यास में इन खिलाडिय़ों का साथ दे रहे हैं।

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गौरतलब है कि झारखंड सरकार द्वारा संचालित आवासीय अभ्यास सेंटर में 30 खिलाड़ी तीरंदाजी का प्रशिक्षण ले रहे थे। लॉकडॉउन के बाद मार्च से ही सेंटर बंद है। यहां से प्रशिक्षण ले रहे सभी खिलाड़ी गांव आ गए। घर आने के बाद इन्होंने संसाधनों के अभाव में भी रास्ता निकालते हुए अपने खेल को जारी रखा। यही जज्बा इन्हें जरूरी विशेष उपलब्धि दिलाएगा।


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