27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

माता-पिता ने ही अपने नवजात बेटे को बेच दिया या कोई बड़ा गिरोह इस घटना में शामिल है

पुलिस के पास इसके लिए समय कहां कि वह इतने बड़े मामले की जांच कर सके। 

3 min read
Google source verification
A big case of selling a newborn baby

बच्चा बेचने के गिरोह का पर्दाफाश करने में जुटी पुलिस

देवरिया. जिले में बच्चा बेचने का एक मामला सामने आने के बाद जो भी इस घटना को सुन रहा वो दांतो के तले उंगलियां दबा रहा है। सभी आरोप-प्रत्यारोप और बयानों पर ध्यान दें तो इस मामले में एक रैकेट चलने का शक तो हो ही रहा है। साथ ही नवजात के मात-पिता को भी अपने संतान को बेचने का संदेह गहराता जा रहा है। हकीकत जो भी हो पर इस घटना ने निश्चित तौर पर मानवता को शर्मसार कर दिया है।

तस्वीर में दिख रही महिला ने नवजात को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे। इसी बीच गांव के पास की ही रहने वाली आशा कार्यकर्ती उसके घर आती है और दोनों को लेकर एक निजी अस्पतला चली जाती है। बेसुध हाल में महिला को क्या पता कि उसके साथ जो हो रहा वो उसकी आंख खुलने के बाद जीवन का सबसे दुख देने वाला समय होगा। हुआ भी वही जैसे ही उसकी आंख खुली आशा ने बताया कि उसके बेटे की मौत हो गई है। फिक क्या था इतना सुनने की ही देर थी कि वहां रोना-पीटना शुरू हो गया। महिला चिल्लाने लगी हमें हमरा बच्चा चाहिये। हंगामा बढ़ता देख आशा ने बच्चा को बेच देने की बात बताई। इतना ही नहीं उसने तो ये भी कह दिय़ा कि बच्चा बेचने में उसके पिता का भी हाथ है।

जी हां पेट की भूख मिटाने के लिये शायद इन्सान किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। कुछ ऐसी ही विवादित तस्वीर देवरिया जनपद के खुखुन्दू इलाके से सामने आ रही है । जहां पर एक नवजात शिशु को गरीबी के कारण बेचने का मामला प्रकाश मे आया है। नवजात शिशु के बेचे जाने से पूरे गाँव में हलचल मच गया है जिससे सभी स्तब्ध हैं। किसी भी मामले में त्वरित अपना निर्णय सुनाने वाली पुलिस इसे गरीब परिवार का पैसा कमाने का खेल बताने पर उतारु है तो पीड़ित महिला को अकारण अस्पताल तक ले जाने वाली आशा कार्यकर्ती की भूमिका की जाँच की बात स्वास्थ्य विभाग कर रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार अजय प्रसाद की गर्भवती पत्नी के पेट में दो दिन पूर्व तेज दर्द हुआ। परिजनों ने घर के पास के ही इस कार्य मे निपुण महिला को बुलवा लिया। परिजन बताते हैं कि प्रसव नार्मल तरीके से हो गया। जच्चा-बच्चा दोनो स्वस्थ थे । इस दौरान गाँव की आशा को जानकारी हुई और उसने उक्त महिला को इलाज करवाने के बहाने सलेमपुर सीएचसी पर पहुँचा दिया । वहाँ पहुँचने पर उक्त महिला बेसुध अवस्था मे थी ।जब महिला को होश आया तो उसे बता दिया गया कि उसका बच्चा मर गया है। ये बात सुनते ही वहाँ रोना मच गया। इस बात को पीड़िता मानने को तैयार नहीं थी और इसके बाद जब पीड़िता ने पूछताछ करने लगी तो वहाँ मचे हो-हल्ला को देखते हुए दबाव में आकर आशा कार्यकर्ती ने बताया की बच्चे को दस हजार में भाटपाररानी थाना क्षेत्र के बेलपार गाँव में बेचा गया है और तुम्हारे पति को पांच हजार रुपये दिलवाया गया है। बाकी का पैसा हम लोग बाँट लिए हैं । मामला थाना पुलिस और सीएमओ कार्यालय तक पहुँच गया। घटना के बावत मुख्य चिकित्साधिकारी का कहना था कि मामला संज्ञान में आया है। गंभीरता से जाँच कर कार्यवाही की जाएगी। वहीं इस मामले पर सीओ सदर ने कहा कि खुखुन्दु पुलिस की जांच में यह पता चला है कि महिला ने यह लिखकर दिया था कि हमने स्वयं बच्चे को बेच दिया था जब गाँव वालो का दबाव पड़ा तो हमने बच्चा वापस ले लिया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या कोई माँ अपने बच्चे को बेच सकती है ? क्या गरीबी के कारण कोई परिवार क्या अपने नवजात शिशु को चन्द रुपयो में बेच सकता है ?

प्रश्न यह भी है कि सामान्य प्रसव के बावजूद आशा कार्यकर्त्री ने क्यों स्वस्थ जच्चा-बच्चा को दूर के सलेमपुर अस्पताल तक पहुँचाया। इन सारे प्रश्नों का जवाब ढूंढने के बजाए जिम्मेदार यह कहते फिर रहे हैं कि कार्यवाही की जायेगी जब कि एक माँ खुद मीडिया के कैमरे पर यह कहती हुई मिलती है कि मुझे कुछ नही मालूम ! आखिर किस के दबाव में यह बड़ा मामला दबाया गया यह जाँच का विषय है।

चार घंटे तक मां से दूर रहा मासूम

आरोप प्रत्यारोप में कितनी सच्चाई है ये तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। लेकिन इन सब बातों के बीच एक संदेह तो पुख्ता होता दिख रहा कि जिले में कोई रैकेट काम कर रहा है जो नवजात को बेचने के लिए योजनाबद्द तरीके से आशा कार्यकर्त्री और कुछ अस्पतालों का सहारा लेकर ये काम कर रहे हैं।बच्चे को पहले मृत बता दिया गया। पांच घंटे के बाद उसे फिर मां की गोद में दे दिया गया। शायद अगर इतना हंगामा न होता तो बच्चे को मृत मानकर बेसुध मां जिंदगी भर रोती तड़पती रहती। जबकि बच्चा किसी और का होकर रह जाता। सब कुछ के बाद आखिरकार नवजात चार घंटे के बाद अपनी मां की गोद में वापस लाया जा सका। कई सवाल हैं जिसका पर्दा उठाना पुलिस के लिए आवशयक है। यह देवरिया का पहला मामला नहीं है इसके पहले कुशीनगर जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था।

बड़ी खबरें

View All

देवरिया

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग