
हेलिकाप्टर हादसे में वरुण सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिनका बेंगलुरु के कमांड अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार को जैसे ही जनपदवासियों को वरुण के मौत की खबर मिली वे गमगीन हो गए । उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनका वरुण अब उनके बीच नहीं है। जब से वरुण घायल हुए थे तभी से लोग उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने के लिए जगह -जगह पूजा अर्चना व हवन कर कर रहे थे।
वरुण सिंह देवरिया के कन्हौली गांव के रहने वाले थे। वह मूलरूप से फाइटर पायलट थे। साल 2007 से 2009 तक उनकी गोरखपुर में पोस्टिंग रही है। वह जगुआर फाइटर प्लेन उड़ाते रहे। गोरखपुर से उनका हैदराबाद तबादला हुआ था। इन दिनों तमिलनाडु के वेलिंगटन में तैनाती थी। वेलिंगटन स्थित डिफेंस एकेडमी के कार्यक्रम में सीडीएस रावत को हिस्सा लेना था, कैप्टन उनके साथ जा रहे थे, लेकिन पहले ही हादसा हो गया। चार माह पहले वरुण सिंह राष्ट्रपति के हाथों शौर्य चक्र से सम्मानित हुए थे। वरुण सिंह की प्रारंभिक पढ़ाई उड़ीसा में हुई। पह एनडीए की परीक्षा पासकर वायु सेना में अधिकारी बने। विंग कमांडर के पद से पदोन्नत होकर ग्रुप कैप्टन बनाए गए। उनके पिता कृष्ण प्रताप सिंह आर्मी में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वरुण के छोटे भाई तनुज सिंह मुंबई में भारतीय नौसेना में अधिकारी हैं।
पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे थे वरुण
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे थे। वरुण के चाचा अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सेना के अधिकारियों द्वारा हादसे में वरुण के घायल होने की सूचना मिलने के बाद से ही ईश्वर से उनके ठीक होने की कामना की जा रही थी। माता-पिता को बाहर से ही बेटे को देखना पड़ा था। इस दौरान ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के पिता रिटायर्ड कर्नल केपी सिंह ने कहा था कि उनका बेटा यह जंग जीतकर जल्द वापस आएगा।
कैप्टन अगस्त में आए थे अपने गांव-
कैप्टन वरुण सिंह अगस्त माह में अपने गांव कन्हौली आए थे। परिजन बताते हैं कि उन्हें अपनी मातृभूमि से गहरा लगाव था। जब भी यहां आते सबसे मिलते जुलते थे। खेत देखने हमेशा जाया करते थे।
Published on:
15 Dec 2021 06:11 pm
बड़ी खबरें
View Allदेवरिया
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
