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देवरिया में नरसंहार के वो 35 मिनट…हमलावरों के सामने क्यों चुप रहे गांव वाले

Deoria Murder: जमीनी विवाद में 8 साल के बच्चे के साथ 5 लोगों की बेरहमी के साथ हत्या कर दी गई।  

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deoria murder case

भूमि विवाद में 35 मिनट के अंदर 6 हत्याएं, पति-पत्नी, दो बेटियों और बेटे का गला काटा

Deoria Murder: जनपद देवरिया के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव में भूमि विवाद में 6 लोगों की हत्या कर दी गई। सबसे पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या की गई। इसकी जानकारी प्रेमचंद यादव के घर के लोगों को हुई। तुरंत दूसरे टोले से उनके घर के लोग सत्य प्रकाश दुबे के घर पहुंचे। इस दौरान फायरिंग की। उसके बाद घर में घुस गए। ताबड़तोड़ धारदार हथियार से पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 6 लोगों की हत्या की घटना में सिर्फ 35 मिनट का समय लगा।

पुलिस के अनुसार ग्राम पंचायत फतेहपुर के रहने वाले सत्य प्रकाश दुबे के भाई साधु दुबे ने कुछ दिन पहले अपने हिस्से की करीब 10 बीघा भूमि गांव के दूसरे टोले के रहने वाले पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव को बेच दी थी। भूमि बेचने के बाद वह प्रेमचंद यादव के घर रहते थे। तीन माह पहले साधु दुबे गुजरात चले गए।



1 मौत के बदले 6 लोगों की गई जान

भूमि को लेकर काफी दिनों से विवाद चल रहा था। सोमवार की सुबह करीब 7:00 बजे प्रेमचंद यादव बाइक पर सवार होकर दूसरे टोले पर विवादित भूमि को देखने गए थे। खेत के पास विवाद होने लगा। उसके बाद प्रेमचंद यादव सत्य प्रकाश दुबे के दरवाजे पर पहुंच गए। सत्य प्रकाश दुबे के दरवाजे पर विवाद बढ़ गया। उस दौरान सत्य प्रकाश दुबे व अन्य ने मिलकर प्रेमचंद यादव को ईंट से मारकर हत्या कर दी। गांव के लोगों ने बीच बचाव करने की कोशिश की पर तब तक काफी देर हो चुकी थी।

हत्या की जानकारी प्रेमचंद यादव के घर वालों को हुई। दूसरे टोले से ललकारते हुए प्रेमचंद यादव के घर के लोग सत्य प्रकाश दुबे के दरवाजे पर पहुंचे। सभी लोग घर में दरवाजा बंद कर छुप गए थे। लेकिन आक्रोशित लोग दरवाजा तोड़कर घर के अंदर घुस गए। घर में सभी को बारी-बारी से धारदार हथियार से हत्या कर दी। मृतकों में एक ही परिवार के पांच लोग शामिल हैं। जिसमें सत्य प्रकाश दुबे तथा उनकी पत्नी किरण दुबे एवं पुत्री सलोनी, नंदिनी के अलावा पुत्र गांधी दुबे शामिल हैं। इस दौरान प्रकाश दुबे के पुत्र अनमोल दुबे घायल हो गए जिन्हें मेडिकल कॉलेज देवरिया में भर्ती कराया गया है।


हमलावरों के सामने क्यों चुप रहे गांव वाले?

भीड़ का आक्रोश देखकर गांव वालों कि रूह कांप गई। दरअसल जिस आक्रोश से दूसरे पक्ष ने घर पर हमला किया इसे देखकर गांव वाले अपने जान को जोखिम में न डालना ही उचित समझा। गांव वालें बताते हैं कि उनके सिर पर खून सवार था। किसी की हिम्मत नहीं हुई उनके सामने बीच बचाव करने की।

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