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आधी दुनियां पर राज करने वाले अंग्रेजों को भी यहां माँ दुर्गा की शक्ति के आगे झुकना पड़ा था

देवरिया के अहिल्यापुर गाँव स्थित सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर के आगे अंग्रेजी हुकूमत ने भी घुटने टेक दिये थे

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durga temple

मां दुर्गा का मंदिर

सूर्य प्रकाश राय की रिपोर्ट

देवरिया. तकरीबन आधी दुनिया जिस ब्रिटीश हुकूमत के आगे नतमस्तक थी उस अंग्रेजी शासन को भी आदि शक्ति माँ दुर्गा के समक्ष शीश झुकना पड़ा था । जी हाँ अहिल्यापुर में स्थित मंदिर में विराजमान माता दुर्गा जी की स्वयंभू पिंड के बारे में बुजुर्गो से यही सुनने को मिलता है ।

कहा जाता है कि ब्रिटीश हुकूमत में सूर्य कभी अस्त ही नहीं होता था। हजारो किलोमीटर वाली ब्रिटिश हुकूमत के आगे ना जाने कितनी ही रियासतें नतमस्तक थीं लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा की तकरीबन आधी दुनिया पर राज करने वाली अंग्रेजी हुकूमत को भी देवरिया के अहिल्यापुर गाँव स्थित सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर के आगे झुकना पड़ा था । इस मंदिर को लेकर आस-पास के गाँव के लोग कई तरह के वृतान्त बताते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो सदियों पुराने इस मंदिर से जुड़ा इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। ग्रामीणों की मानें तो देवी की शक्ति के आगे फिरंगी हुकूमत को भी घुटने टेकने पड़े थे। अहिल्यापुर स्थित मंदिर से थोड़े दूर से एक रेलवे लाइन गुजरती है। अंग्रेजों के जमाने में इस रेलवे लाइन को मंदिर से होकर गुजरना था लेकिन मां की शक्ति के आगे अंग्रेज अधिकारियों की एक ना चली।

गोरखपुर से बनारस और बिहार की ओर जाने वाले रेलवे ट्रैक पर देवरिया के बाद पड़ता है अहिल्यापुर रेलवे स्टेशन। तकरीबन 100 साल पहले जब अंग्रेजों द्वारा इस रूट पर मीटर गेज लाइन का निर्माण चल रहा था उस समय अंग्रेज अधिकारियों ने फैसला ले लिया कि रेलवे लाइन इस मंदिर से होकर गुजरेगी जबकि स्थानीय लोगों ने अंग्रेज अधिकारियों से रेलवे ट्रैक को मंदिर से थोड़ी दूर से ले जाने का आग्रह किया लेकिन अंग्रेजों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।अंग्रेज अधिकारियों ने रेलवे लाइन वहीं से गुजारने का बाकायदा फरमान भी जारी कर दिया। यही नहीं मां दुर्गा के प्राकट्य पिंडी के ठीक उपर से रेलवे पटरी बनाने का काम शुरू हो गया।

अंग्रेज अफसरों के होश उस वक्त उड़ गए जब शाम को बिछाई गई पटरियां सुबह अपने-आप क्षतिग्रस्त मिलीं। पहले-पहले तो अंग्रेजों ने इसे किसी ग्रामीण की शरारत माना और आम लोगों को परेशान करने लगे लेकिन बावजूद इसके दुबारा से बिछाई गई पटरियां भी अगले दिन टूटी हुई अवस्था में मिलीं। ऐसा बारम्बार होने लगा । महीनो तक पटरिया बिछाने का कार्य चलता रहा दिन भर पटरिया बिछाई जाती रात में सब अस्तव्यस्त मिलता । एक दिन रेलवे के तत्कालीन इंजीनयर को माता जी का स्वप्न दिखाई पड़ा । जिसमे माँ भवानी ने उस अंग्रेज इंजीनयर को यह आदेश दिया की समय रहते रेल की पटरियों को कही अन्यत्र स्थापित करो अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे । अंग्रेज इंजीनियर ने बीते रात के स्वप्न का पूरा वृतान्त अपने वरिष्ट अधिकारियो को सुनाया । माँ भवानी की शक्ति के आगे अंग्रेज अफसरों ने भी घुटने टेक दिये और फिरंगी अफसरों ने रेल की पटरी को 100 मीटर दक्षिण स्थापित करने का निर्णय लिया । यही नहीं तत्कालीन अंग्रेज अफसरों ने रेलवे ट्रैक के निर्माण की सफलता के लिए मां के मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया। तब जाकर रेल की पटरिया बिछाने का कार्य पूरा हुआ ।

वर्तमान में इस मंदिर में माँ दुर्गा स्वयंभू पिंड के रूप में विराजमान है एवं पिंड के बगल में सिंहवाहिनी दुर्गा जी का प्राण प्रतिस्ठीत विग्रह स्थापित है| ये मंदिर सिद्धपीठ देवरिया जनपद मुख्यालय से 8 किमी. की दूरी पर देवरिया- सलेमपुर मार्ग के मुण्डेरा बुजुर्ग चैराहा से उत्तर ग्रामसभा अहिल्वार बुजुर्ग से सटे स्थित रेलवे लाईन के उत्तर तरफ अवस्थित है। वैसे तो वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है किन्तु चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में भक्तजन यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं।

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