3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रेजिडेंशियल मार्केट में सुस्ती बरकरार, कॉमर्शियल सेक्टर की मांग बढ़ी 

सरकार और आरबीआई द्वारा पॉलिसी लेवल पर कई अहम बदलाव के बावजूद इस साल रियल्टी सेक्टर एवरेज ही रहा

less than 1 minute read
Google source verification

image

Bhup Singh

Dec 30, 2015

Real estate

Real estate

नई दिल्ली। रियल्टी सेक्टर साल 2015 में कुछ खास बूम नहीं कर पाया। सरकार और आरबीआई द्वारा पॉलिसी लेवल पर कई अहम बदलाव के बावजूद इस साल रियल्टी सेक्टर एवरेज ही रहा। मार्केट में खरीददार नहीं मिलने से डेवलपर्स पर अनसोल्ड इनवेंट्री का दबाव बना रहा। इसके चलते देश भर में प्रॉपर्टी की कीमतें 10 से 15 फीसदी तक गिरीं। इसके उलट मेक इन इंडिया, आईटी सेक्टर, रिटेल जोन और ई-कॉमर्स की ओर से कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की लीजिंग होने से ऑफिस स्पेस की मांग पूरे साल बनी रही।

साल 2015 रेजिडेंशियल रियल्टी के लिए भी कुछ खास नहीं रहा। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की मांग नहीं होने से नई प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग में कमी आई। देश के कुछ लोकेशंस जैसे मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ी तो ज्यादातर लोकेशंस में मांग कम ही रही। हालांकि इसका असर कॉमर्शियल सेक्टर पर नहीं हुआ। इस सेक्टर में मांग पूरे साल बनी रही।

2011 के बाद दूसरी बार एक साल (2015) में 3.5 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की लीजिंग हुई। फिर भी पैन इंडिया वैकेंसी लेवल 16 फीसदी रहा, जो कि वास्तव में 8 से 9 फीसदी पर होनी चाहिए थी। इस साल पीई (प्राइवेट इक्विटी) फंड के जरिए रियल्टी में रिकॉर्ड निवेश हुआ। पीई के जरिए सबसे अधिक निवेश एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु में हुई।

ये भी पढ़ें

image