आश्रय केंद्र में एक पालने के साथ अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। अनचाहे शिशु को इस पालने में छोडऩा होगा। छोडऩे वाले के चले जाने के दो मिनट बाद घंटी बजेगी। इसके बाद वहां ड्यूटी करने वाले डॉक्टर उस बच्चे को अपने संरक्षण में ले लेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने इसका स्लोगन ही दिया है, फेंके नहीं, हमें दें ... आश्रय - प्यार का, दुलार का और भविष्य निर्माण का। जागरूकता संदेश के तौर पर स्वास्थ्य विभाग ने साफ लिखा है, किसी भी अनचाहे शिशु को यूं ही कहीं नहीं फेंके। उसे अस्पताल परिसर में स्थापित आश्रय केंद्र के पालने में छोड़ जाएं। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है , इसके लिए ट्रॉमा सेंटर के पास केंद्र खोला जाएगा।