बागली की युवती ने कोर्ट में किया था वाद दायर, कामयाबी पर अपनों का धोखा
देवास. देशभर में यूपी की एसडीएम ज्योति मौर्य की चर्चा हो रही है जिसने अफसर बनते ही अपने पति को ठुकरा दिया वहीं एमपी में ऐसा केस सामने आया है जिसमें पति ने ऐसी बेवफाई की। सात जन्म तक साथ निभाने वाले वचन को देवास की युवती ने बखूबी निभाया। अपने पति को पढ़ाने के लिए घर-घर काम किया लेकिन अफसर बनते ही उसने पत्नी को ही छोड़ दिय।
यह पूरी कहानी है बागली तहसील के ग्राम आरिया निवासी निवासी ममता बाई की। ममता बाई के पहले पति का निधन हो गया। वह आलीराजपुर के कोठड़ी निवासी कमरू के संपर्क में आई। दोनों में प्रेम हो गया और 2015 में कोर्ट मैरिज कर ली। कमरू स्नातक उत्तीर्ण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। शादी के बाद ममता और कमरू इंदौर आ गए। यहां कमरू परीक्षा की तैयारी करने लगा और ममता घरों में साफ-सफाई, बर्तन मांजने जैसे काम करने लगी ताकि उसका पति परीक्षा में सफल हो सके।
वह उसे हर सरकारी नौकरी का फॉर्म भरवाती। वह स्कूल में नौकरी के साथ बस कंडक्टर तक बनी। उसका संघर्ष रंग भी लाया। पति परीक्षा पास कर वाणिज्यिक कर अधिकारी बन गया पर पति पर कामयाबी का नशा इस कदर चढ़ा कि जीवनसंगिनी को ही दर-दर भटकने ने छोड़ दिया। पति ने दूसरी शादी भी कर ली। धोखा पाने के बाद पीडि़ता ने बागली न्यायालय में वाद भी दायर किया है। फिलहाल महिला अपने मायके में रहकर न्याय का इंतजार कर रही है।
करीब छह साल साथ रहे, अब नहीं दे रहा रुपए
कोर्ट मैरिज के बाद ममता और कमरू छह साल साथ रहे, लेकिन नौकरी के बाद कमरू ने छोड़ दिया। पुलिस में शिकायत भी की थी। जिस पर उनका समझौता करवाया था। न्यायालय में वाद दायर करने के बाद कमरू ने कहा था कि 12 हजार रुपये प्रतिमाह देगा। इसके बाद भी वह महिला को रुपए नहीं दे रहा है। महिला का आरोप है कि वह फोन भी नहीं उठाता।
अफसर बनते ही बदला व्यवहार, पत्नी को छोड़ गया
2019-20 में कमरू को सफलता मिली और वााणिज्यकर अधिकारी पद पर चयन हो गया। पोस्टिंग रतलाम में हुई हुई। डेढ़ साल तक ममता के साथ रतलाम रहा लेकिन इसी बीच जोबट निवासी युवती के साथ रहने लगा। वह ममता को मायके छोड़ गया। ममता ने पुलिस को जानकारी दी तो उन्होंने कमरू को बुलाया और समझाइश दी। दोबारा कमरू उसे ले गया लेकिन कुछ समय बाद फिर छोड़ गया।