
देवास. पर्वाधिराज श्री पर्युषण महापर्व का आज का दिन साधना जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। भगवान महावीर के जन्म.काल, साधना.काल तथा सिद्धि.काल की विषद विवेचना सुनकर हमारा मन, मस्तिष्क उस विभूति के चरणों में झुक जाता है जिसने सिर्फ उपदेश ही नहीं दिए सर्वप्रथम उनका स्वजीवन में पालन किया। वे जानते थे जीवन में अहं होगा तो अर्हं याने प्रभु की प्राप्ति नहीं होगी। अजन्मा बनने के लिए ही जिनका जन्म हुआ। जिन बनने के लिए ही जिनका जीवन था। निर्वाण पाने के लिए ही जिन्होंने मृत्यु प्राप्त की। ऐसे महावीर स्वामी को जिसने भी अपने अंर्तमन में स्थापित कर लिया वह व्यक्ति ही इस जीवन को सार्थक कर सकेगा।
श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर में धर्मसभा को उपदेशित करे हुए साध्वी श्री हिमज्योति जी एवं हितदर्शिता जी यह बात कही। उन्होंने कहा कि.प्रभु महावीर के जीवन में इन विशिष्टता के दर्शन होते है। प्रकृष्ट साधना , प्रकृष्ट तप तथा प्रकृष्ट समता। उन तीन विशेषताओं के आधार पर ही आपने सम्यक दर्शन, ज्ञान एवं चारित्र की प्राप्ति की। संपन्न परिवार एवं विशाल साम्राज्य का परित्याग करके प्रभु ने संयम पथ पर प्रस्थान किया एवं साधना को मूल मंत्र मनाया। साढ़े 12 वर्ष के साधनाकाल में प्रभु ने मौन रख कर विशिष्ट ऊर्जा प्राप्त की। धरती पर बैठकर या लेटकर कभी शयन न करके कायिक शक्ति संपादित की। कायोत्सर्ग ध्यान में रहकर तत्व के महत्व का चिंतन करके मानसिक बल प्राप्त किया।
संयम दीक्षा प्राप्त करने के एक वर्ष पूर्व एक दिन में एक करोड़ आठ लाख स्वर्ण मोहर का दान करते हुए एक वर्ष में तीन अरब इठ्यासी करोड़ अस्सी लाख स्वर्ण मोहर का दान दिया। दीक्षा दिन से ही परमात्मा ने विशिष्ट तपस्या का शुभारंभ किया। साढ़े बारह वर्ष के संयम.काल में सिर्फ 349 दिन ही प्रभु ने भोजन लिया, वह भी दिन में एक बार । परमात्मा की तपस्या का विवरण यदि हम सुने तो स्तब्ध रह जाएंगे। प्रवक्ता विजय जैन ने बताया दोपहर में श्री पाश्र्वनाथ पंचकल्याणक पूजन का आयोजन हुआ। जिसका लाभ दिलीप पुखराज दोशी परिवार ने प्राप्त किया। पलना जी की भक्ति का लाभ पुखराज बाई रमणलाल चौधरी परिवार ने प्राप्त किया। इस अवसर पर सांसद मनोहर उटवाल, विधायक गायत्री पवार, महापौर सुभाष शर्मा, भाजपा नेता दुर्गेश अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष ओम जोशी, रेवंत राजोलू, मप्र कांग्रेस महामंत्री मनोज राजानी, पूर्व महापौर जयसिंह ठाकुर, दीपेश कानूनगो उपस्थित थे। रात्रि महाआरती के पश्चात रंगारंग भक्ति भावना के कार्यक्रम संपन्न हुए।
Published on:
23 Aug 2017 08:53 pm
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