
गीरजागरो में तो मोबाईल फोन से ओन लाईन सभीलोगो नें ईसु भगवान की प्रर्थना की ।,बांगर स्थित अमलतास अस्पताल में भर्ती मरीज।
देवास। प्रशासन द्वारा क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए अमलतास अस्पताल को लेकर वहां भर्ती मरीज अव्यवस्था के आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि हमको यहां कैद कर दिया है। कोई डॉक्टर ही नहीं आता इलाज के लिए। कंपाउंडर आता है और दूर से देखकर चले जाता है। इधर प्रशासन का कहना है कि हम खुद रोज जाकर व्यवस्था देख रहे हैं। स्पेशल डॉक्टर रखे हैं, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था है। लोग स्टाफ को परेशान करके अनावश्यक मांगे करते हैं। पहले तो खुद ने गलती की और अब अव्यवस्थाओं के आरोप लगा रहे हैं।
दरअसल शहर में पीठा रोड व नाहर दरवाजा क्षेत्र में दो कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए थे। दोनों को अमलतास अस्पताल में भर्ती करवाया था। इनमें से एक महिला को गुरुवार को इंदौर रैफर किया गया लेकिन दूसरे मरीज को अमलतास में ही भर्ती रखा गया है। यहां पर अन्य संदिग्ध मरीज भी भर्ती हैं जिनका सेंपल लिया गया है। उनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। जिन लोगों को क्वारंटाइन में यहां रखा गया है वे अव्यवस्थाओं के आरोप लगा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि यहां की व्यवस्थाएं बदहाल है।कोई सुध लेने वाला नहीं है। प्रशासन का अस्पताल प्रबंधन पर किसी रह का अंकुश नहीं है।इसके चलते मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अभी भी भर्ती हैं मरीज, सब डरे हुए
वर्तमान में अमलतास अस्पताल में कई संदिग्ध भर्ती हैं। इनमें से २३ लोग वे हैं जो कोरोना पॉजिटिव मृतका महिला के अंतिम संस्कार में गए थे। इनमें से कुछ के सैंपल लिए हैं लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। ये लोग ठीक से इलाज नहीं होने व सुविधाओं के अभाव की बात कह रहे हैं। हालांकि प्रशासन इन आरोपों को निराधार बताकर मनमानी की बात कह रहा है।
कलेक्टर ने किया भ्रमण
शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. श्रीकांत पांडेय ने एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी और एसडीएम अरविंद चौहान के साथ अमलतास हॉस्पिटल का भ्रमण किया। यहां भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य का जायजा लिया। इनके भोजन, पानी की व्यवस्था के निर्देश दिए। कलेक्टर ने देवास के सभी नागरिको से अपील है किनागरिकों द्वारा जो डिस्पोजेबल मास्क उपयोग में लाए जा रहे हैं उन्हें यहां-वहां न फेकें।
व्यवस्थाएं दुरुस्त है, मरीज परेशान करते हैं स्टाफ को
एसडीएम अरविंद चौहान ने बताया कि मैं रोज अमलतास अस्पताल की व्यवस्था का जायजा ले रहा हूं। मरीजों के बयान भी लिए हैं। बैठे-बैठे बेवजह की शिकायत कर रहे हैं। आज ही दूध की मांग हुई तो गर्म दूध लाकर दिलवाया। कैंटीन से गर्म खाना दे रहे हैं। किसी तरह की अव्यवस्था नहीं है। ये लोग चाहते हैं कि कैसे भी यहां से निकलकर घर जाएं। पहले तो गलती की और अब आरोप लगा रहे हैं। क्वारंटाइन का मतलब यही है कि १४ दिन निगरानी में रहना है। स्टाफ को परेशान करते हैं। अनावश्यक मांग करते हैं। खाना-पीना, दवाई सब मिल रही है। स्पेशल डॉक्टर व अटेंडर इनके लिए ही लगा रखे हैं। इनको पांच बार चाय चाहिए। दूसरी चीजें चाहिए। घर जैसी सुविधा चाहिए। जबकि प्रशासन और डॉक्टर्स पूरा ध्यान रख रहे हैं। हमारी कोशिश है कि शहर में कोरोना का संक्रमण न फैले। इसके बावजूद कुछ लोग समझ नहीं रहे।
Published on:
11 Apr 2020 05:38 pm
बड़ी खबरें
View Allदेवास
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
