9 माह से 5 साल के बच्चों का सर्वे हो रहा, खसरा व रूबेला के टीके की जान रहे स्थिति, फाइनल रिपोर्ट से खसरे के मरीजों का भी चलेगा पता
देवास. जानलेवा व संक्रामक बीमारियों में शामिल खसरे से बचाव के लिए टीका लगाने की दर जिले में पहले व दूसरे टीके में काफी अलग है। पहले टीके का प्रतिशत 88 काफी बेहतर है लेकिन दूसरे टीके में 7 प्रतिशत की कमी दर्ज हो रही है, यह 81 प्रतिशत के आसपास है। इस अंतर को पूरा करते हुए दोनों टीकाकरण की दर को और बढ़ाना है ताकि बीमारी से उन्मूलन की स्थिति तक पहुंचा जा सके। ऐसा करने के लिए टीकाकरण को 95 प्रतिशत तक ले जाना होगा और कम से कम एक साल तक इस स्थिति को रखना होगा। प्रतिशत में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग का विशेष सर्वे चल रहा है जो ८ नवंबर तक प्रस्तावित है। इसके बाद दो चरणों में नवंबर व दिसंबर में विशेष सत्र आयोजित कर टीकाकरण किया जाएगा। 9 माह से 5 साल तक के बच्चों का सर्वे कार्य आशा कार्यकर्ता, एएनएम की टीमों द्वारा पूरे जिले में किया जा रहा है। इसके तहत खसरा, रूबेला के पहले व दूसरे टीके की स्थिति जानी जा रही है। प्राथमिक स्कूलों, प्ले स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र आदि से भी जानकारी एकत्रित की जा रही है। इसके अलावा घरों तक टीमें पहुंच रही हैं और पालकों से बच्चों को टीके लगाने संबंधी जानकारी प्राप्त कर रही हैं। यह अभियान 8 नवंबर तक प्रस्तावित है, इसके बाद जिलेभर की फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी। इसी से यह भी पता चलेगा कि जिले में खसरा से पीडि़त संदिग्ध बच्चे हैं या नहीं। यदि संदिग्ध मिलते हैं तो उनकी जांच करवाई जाएगी।
बाल दिवस से होगी प्रथम चरण की शुरुआत
टीकाकरण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद बाल दिवस 14 नवंबर से पहले चरण के विशेष टीकाकरण सत्र की शुरुआत की जाएगी जो 19 नवंर तक चलेगा। इसके बाद अगले महीने दिसंबर में टीकाकरण का दूसरा चरण 19 से 24 दिसंबर तक चलाया जाएगा। टीके का पहला डोज 9 से 12 माह व दूसरा डोज 16 से 24 माह के बीच लगता है।
वर्जन
खसरा-रूबेला टीके से वंचित बच्चों की पहचान के लिए सर्वे करवाया जा रहा है। इसके बाद दो चरणों में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। दूसरे चरण के बाद टीके लगाने की दर 95 प्रतिशत को एक साल तक मेनटेन रखना है। इसी के हिसाब से देश को खसरा उन्मूलन संबंधी प्रमाण पत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दिया जाएगा।
-डॉ. सुनील तिवारी, जिला टीकाकरण अधिकारी।
किशोरों, युवकों, बुजुर्गों में दिखे लक्षण तो होगी जांच
खसरे के उन्मूलन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत बुखार व शरीर पर दाने की स्थिति वालों की पहचान की जाएगी। पहले खसरा लक्षण व जांच सिर्फ 5 साल तक के बच्चों की होती थी लेकिन यदि अधिक आयु के लोगों में भी लक्षण पाए जाते हैं तो अब उनकी भी खून की जांच व गले से सेम्पल लेकर स्वाब टेस्ट किया जाएगा।