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अनुपयोगी कचरे से बनेगी बिजली, उज्जैन में लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, योजना में देवास भी शामिल

क्लस्टर बनाकर होगा काम, नगर निगम ने दी प्रारंभिक सहमति, स्वीकृति मिलने के बाद शुरू होगी कवायद  

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अनुपयोगी कचरे से बनेगी बिजली, उज्जैन में लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, योजना में देवास भी शामिल

अनुपयोगी कचरे से बनेगी बिजली, उज्जैन में लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, योजना में देवास भी शामिल

देवास. अगर सबकुछ सही रहता है तो आने वाले दिनों में शहर से निकलने में कचरे से बिजली भी बनाई जा सकती है। सरकार द्वारा इस दिशा में काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उज्जैन, देवास, नागदा सहित आसपास के अन्य नगरीय निकायों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत उज्जैन में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट तैयार कर रिसाइकल न होने वाले कचरे से बिजली बनाने की योजना है। इसे लेकर भोपाल से नगर निगम को पत्र लिखकर सहमति मांगी थी। नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए सहमति दे दी है। अगर स्वीकृति मिलती है तो उज्जैन में प्लांट तैयार होगा। इसके बाद शहर से निकलने वाले कचरे में से जो कचरा रिसाइकल नहीं हो पाता उसे उज्जैन भेजा जाएगा। फिलहाल प्रोजेक्ट प्रारंभिक स्तर पर है।

बड़ी मात्रा में निकलता है कचरा

उल्लेखनीय है कि शहर से लगभग 100 टन के आसपास कचरा निकलता है। इसमें गीले-सूखे कचरे का नगर निगम द्वारा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर निष्पादन किया जाता है। इसके अलावा कुछ कचरे का निष्पादन नहीं हो पाता है। ऐसे में उसका कोई उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में इस कचरे को सीमेंट फैक्टरियों को दिया जाता है। इस्तेमाल नहीं होने वाला यह कचरा इन जगहों पर ईंधन के रूप में काम आता है। इसी कचरे का उपयोग कर बिजली भी बनाई जा सकती है, इसलिए अब सरकार इस ओर कदम बढ़ा रही है। सबकुछ ठीक रहा तो उज्जैन में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित होगा और देवास सहित अन्य नगरीय निकायों से कचरा वहां भेजा जाएगा।

देश के कई शहरों में बने हैं प्लांट

उल्लेखनीय है कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट देश के कई बड़े शहरों में संचालित हो रहे हैं। जहां इस तरह के कचरे से बिजली बनाई जा रही है। प्रदेश में रीवा में भी ऐसा प्लांट तैयार किया गया है जहां रीवा नगर निगम सहित आसपास के 35 नगरीय निकायों को मिलाकर क्लस्टर बनाया गया है।

बायो सीएनजी प्लांट की स्वीकृति का इंतजार

उधर स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम द्वारा करीब 17 करोड़ रुपए की लागत से 100 टन का बायो सीएनजी प्लांट स्थापित किया जाना है। इसके लिए सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है लेकिन फाइनल स्वीकृति मिलना बाकी है। स्वीकृति मिलती है तो गीले कचरे को उपचारित कर सीएनजी गैस बनाने के लिए प्लांट स्थापित हो सकेगा। इसे लेकर भोपाल व दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है और संभावना है कि स्वीकृति मिल जाएगी।

सहमति दी है

-उज्जैन में प्रस्तावित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए नगर निगम से सहमति मांगी थी। हमने सहमति दे दी है। बायो सीएनजी प्लांट के लिए स्वीकृति मिलना बाकी है। स्वीकृति आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।-गीता दुर्गेश अग्रवाल, महापौर