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जनसुनवाई में गूंजा ओम स्वती ना इंद्रो वृदस वाहा……

- सिद्धेश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्थाएं बिगाड़़ रहे महंत, ब्राह्मणों ने पहले किया मंत्रोच्चार फिर रखी अपनी बात

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देवास.
धोती-कुर्ता पहने ढेर पंडित मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे। अपना नंबर आने के बाद सभी ने संस्कृत में श्लोक शुरू कर दिया। सभी ने मंत्र ओम स्वती ना इंद्रो वृदस वाहा... का पाठ किया। कलेक्टर आशीष सिंह ने भी जनसुनवाई में गूंज रहे मंत्रों पर कोई आपत्ति नहीं ली। मंत्रोच्चार के बाद तमाम पंडितों ने अपनी बात रखी, जिसे कलेक्टर ने सुनकर हल करने का आश्वासन दिया।
नेमावर के नर्मदा तट स्थित प्राचीन सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में मठ के महंत द्वारा व्यवस्थाएं बिगाड़ते हुए काम किया जा रहा है। शासन की देखरेख में संचालित होने वाले मंदिर में मनमानियां की जा रही है। इनमें सुधार व नवीन प्रबंधन समिति का गठन करवाने की मांग करते हुए मंदिर से जुड़े ब्राह्मणों सहित नगरवासियों की ओर से मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन दिया गया। आवेदन में उल्लेख है कि मंदिर की व्यवस्थाएं महंत गजानंद पुरी व उनके रिश्तेदार बिगाड़ रहे हैं। मंदिर में अपना पैतृक अधिकार साबित करने के लिए साजिश कर रहे हैं। मंदिर के गर्भगृह में कभी कोई पाट बड़ा पटिया या अन्य सामग्री नहीं रखी जाती थी। केवल सुबह 11 से 12 बजे तक व शाम 7 से 8 बजे तक शासकीय पुजारी पूजन, आरती के लिए एक घंटे तक छोटा पाट लगाया करते थे, लेकिन कुछ महीनों से महंत व उनके रिश्तेदारों ने बड़ा पाट व बाल्टी, भगोने, अतिरिक्त दान पात्र रख दिए हैं। वे स्वयं, उनके रिश्तेदार व कर्मचारी भी गर्भगृह में बैठते हैं जिससे व्यवस्थाएं बिगड़ रही हैं। कर्मकांडी ब्राह्मणों सहित श्रद्धालु भी परेशान हो रहे हैं। ऐसे में पाट व अतिरिक्त सामग्री हटवाई जाए। मंदिर की व्यवस्थाओं में महंत व रिश्तेदारों का हस्तक्षेप बंद किया जाए। पुरोहितों से महंत व उनके रिश्तेदार अभद्र व्यवहार करते हैंं, मंदिर में आने वाले चढ़ावे को अपना बताकर घर ले जाते हैं, इसे रोका जाए। पूर्व में प्रशासन ने पाट व सामग्री हटवाई थी, लेकिन आदेश का उल्लंघन किया गया है। मंदिर प्रबंधन समिति सक्रिय नहीं है, इसे भंग करवाकर नवीन समिति गठित करें। चढ़ोतरी उठाने के बदले सदाव्रत बांटने, परिक्रमावासियों के भोजन की व्यवस्था महंत के द्वारा होना चाहिए, इसका पालन नहीं हो रहा। सिद्धनाथ मंदिर संस्थान का मठ दत्त अखाड़ा उज्जैन से संबंधित है, यहां नागा साधु, सन्यासी ही रह सकते हैं, वर्तमान महंत ने परिवार व रिश्तेदार को रख लिया है। महंत के अविवाहित रहने का प्रावधान है किंतु महंत ने विवाह करके शास्त्रोक्त नियमों का उल्लंघन किया है। पूर्व जेल मंंत्री हरनामसिंह राठौर द्वारा मंदिर में 11 किलो चांदी का मुखौटा, जलाधारी, नाग बनाकर चढ़ाए गए थे, ये वस्तुएं वर्तमान में कहां और किसके पास हैं, इसका पता लगाकर प्रशासन इससे अवगत करवाए। आवेदन में नप अध्यक्ष, विधायक प्रतिनिधि, आधा दर्जन पार्षद, भाजपा-कांग्रेस के नगराध्यक्ष आदि के भी हस्ताक्षर हैं।