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केपी कॉलेज में बीबीए-बीसीए के बाद अब बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन और पीजीडीसीए कोर्स शुरू करने की कवायद

--स्वशासी कॉलेज बनने का भी था अवसर लेकिन स्टाफ काउंसिल की बैठक में नहीं बन पाई सहमति

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देवास. लीड केपी कॉलेज को कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए शासन स्तर से पहल हुई लेकिन परिस्थितियों को देख ऐसा संभव नहीं हो पा रहा। उच्च शिक्षा विभाग ने केपी कॉलेज को स्वशासी (ऑटोनोमस) कॉलेज बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा था लेकिन कॉलेज की स्टाफ काउंसिंंल की बैठक में इस पर सहमति नहीं सकी। क्योंकि यदि कॉलेज स्वशासी होता है तो एडमिशन के लिए ६० प्रश कटऑफ का नियम लागू करना होगा जो देवास में मुमकिन नहीं। हालांकि राहतभरी खबर यह है कि केपी कॉलेज में इस साल दो नए पाठ्यक्रम आ सकते हैं। बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन और पीजीडीसीए कोर्स लाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए हैं। लिंक खुलते ही आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

दरअसल किसी कॉलेज के ऑटोनोमस होने के बाद उसे एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाता है। इंदौर का होलकर साइंस ऑटोनोमस है जहां कटऑफ के अनुसार विभिन्न विषयों में एडमिशन होते हैं। 12वीं में जिनके प्रतिशत ज्यादा होते हैं उन्हें पहले मौका मिलता है और फिर घटते क्रम में सीटों के हिसाब से प्रवेश दिए जाते हैं। स्वशासी कॉलेज अपने पेपर खुद सेट करता है और अपनी परीक्षा भी खुद ही करवाता है। उच्च शिक्षा विभाग ने मप्र के उन कॉलेजों को ऑटोनोमस करने के लिए प्रस्ताव मंगवाए थे जिनमें नैक का दौरा हो चुका है और ए ग्रेड मिली है। इसमें देवास का लीड केपी कॉलेज भी शामिल था। जब विभाग ने केपी कॉलेज से प्रस्ताव मांगा तो कॉलेज ने स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई। स्टाफ से इस पर चर्चा की। चर्चा में यह बात निकलकर आई कि यदि कॉलेज स्वशासी होता है तो एडमिशन कम हो जाएंगे और उन्हीं को एडमिशन मिलेंगे जिनके 12वीं में 60 प्रश या उससे ज्यादा अंक हैं। अब तक के इतिहास में केपी कॉलेज में लगभग 50 प्रश एडमिशन ऐसे होते हैं जिनके प्रतिशत ६० से कम होते हैं और ऐनवक्त पर सीटें बढ़ाने के लिए छात्र संगठन आंदोलन करते हैं और मजबूरी में कॉलेज प्रशासन को सीटें बढ़ाकर एडमिशन देना पड़ते हैं। ऐसे में स्वशासी कॉलेज के प्रस्ताव पर आम सहमति नहीं बन पाई और कॉलेज अब पूर्ववत ही चलेगा।

दो नए कोर्स के लिए भेजेंगे प्रस्ताव

स्वशासी कॉलेज का दर्जा भले ही केपी कॉलेज को न मिल पाए लेकिन नवाचार जारी है। पिछले साल बीबीए-बीसीए जैसे पाठ्यक्रम शुरू हुए थे तो इस साल बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन और पीजीडीसीए कोर्स शुरू करने पर विचार चल रहा है । इसकी तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी है और लिंक खुलने का इंतजार किया जा रहा है । फिलहाल देवास के किसी शासकीय कॉलेज में बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन और पीजीडीसीए पाठ्यक्रम नहीं है। प्राइवेट कॉलेजों में ये कोर्स हैं लेकिन वहां फीस ज्यादा है। केपी कॉलेज को यदि ये कोर्स मिलते हैं तो प्राइवेट कॉलेजों की तुलना में दो से तीन हजार रुपए कम फीस रखी जाएगी। कॉलेज की मंशा है कि बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन में 200 सीटें मिल जाएं जबकि शासन शुरुआत में सौ सीटों से नया कोर्स शुरू करता है। यदि दो सौ सीटें होती हैं तो बीकॉम कंप्यूटर एप्लीकेशन में आने वाले आवेदन को बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन में शिफ्ट किया जा सकेगा।

बीसीए में 10 सीट भी नहीं भर सकी

पिछले साल केपी कॉलेज में बीबीए और बीसीए के रूप में दो नए कोर्स शुरू किए गए थे। एडमिशन के पहले इन दोनों कोर्स में अधिकाधिक प्रवेश के लिए काउंसलिंग की गई। प्रेसवार्ता ली गई लेकिन आखिर में हालात चिंताजनक ही निकले। बीबीए में तो प्रवेश ६० से ऊपर हो गए लेकिन बीसीए में १० विद्यार्थी भी नहीं आ सके। दोनों कोर्स में सौ-सौ सीटें थीं। अब समस्या यह भी है कि कोर्स बीच में बंद नहीं कर सकते क्योंकि एक बैच पूरी करना जरूरी है। ऐसे में यदि बीए कंप्यूटर एप्लीकेेशन शुरू होता है तो इस कोर्स में विद्यार्थियों को खींचा जाएगा ताकि बीसीए की कमी दूर हो जाए और विभाग से विशेष अनुमति लेकर इस कोर्स को बंद किया जाए।

हम प्रयास कर रहे हैं

लीड केपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसएल वरे ने बताया कि बीए कंप्यूटर एप्लीकेशन और पीजीडीसीए कोर्स के लिए प्रस्ताव बनाए हैं। लिंक खुलते ही अपलोड कर देंगे। अभी किसी भी शासकीय कॉलेज में ये दोनों कोर्स नहीं है। हमारा प्रयास है कि ये कोर्स शुरू हो जाएं ताकि प्राइवेट कॉलेजों से कम फीस में विद्याॢथयों को इनका लाभ मिल सके। स्वशासी कॉलेज के लिए विभाग ने प्रस्ताव मंगवाए थे लेकिन देवास में यह होना मुश्किल है क्योंकि हमारे यहां अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण अंचल से आते हैं और 60 प्रश से कम अंक वाले होते हैं। यदि स्वशासी महाविद्यालय हो गया तो एक्सीलेंस के लिए 60 परसेंट का कटऑफ नियम लागू करना होगा जिस कारण विद्यार्थी एडमिशन नहीं ले सकेंगे।