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तेंदुए रामू को आज मिलेगा नया घर, पिंजरे से होगा आजाद, खिवनी अभयारण्य में छोड़ेंगे

जंगल में छोड़ने के बाद वन विभाग करेगा निगरानी, उज्जैन वन विभाग की रेस्क्यू टीम आएगी

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तेंदुए रामू को आज मिलेगा नया घर, पिंजरे से होगा आजाद, खिवनी अभयारण्य में छोड़ेंगे

तेंदुए रामू को आज मिलेगा नया घर, पिंजरे से होगा आजाद, खिवनी अभयारण्य में छोड़ेंगे

अंकित जाजू सोनकच्छ। ग्राम इकलेरा के जंगल में 29 अगस्त को बीमार अवस्था में मिले तेंदुए को स्वस्थ होने के बाद सोमवार को नया घर मिलेगा। जबलपुर से आई रिपोर्ट के बाद अब सोमवार को उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। तेंदुआ चार माह से वनविभाग के दौलतपुर विश्राम गृह में पिंजरे में कैद था जहां उसका उपचार किया जा रहा था। अब वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुका है। उज्जैन से रविवार सुबह 11 बजे रेस्क्यू टीम दौलतपुर विश्राम गृह पहुंचेगी जहां से उसे खिवनी अभयारण्य ले जाया जाएगा। वहां उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। तेंदुए को जंगल में छोड़ने के बाद भी वनविभाग द्वारा उसकी निगरानी की जाएगी। विभिन्न साधनों के माध्यम से उस नजर रखेंगे कि इतने दिनों तक बिना शिकार के भोजन मिलने के कारण वर्तमान स्थिति में वो शिकार कर पाता है या नहीं।

लोगों ने की थी सवारी, ली थी सेल्फी

उल्लेखनीय है कि इकलेरा में तेंंदुआ बीमार हालत में मिला था। उस समय वह किसी पालतू जानवर की तरह बर्ताव कर रहा था। भीड़ लगने पर भी वह आक्रामक नहीं हुआ था। इसके बाद लोगों ने उसकी सवारी की थी और उसके साथ सेल्फी तक ले डाली थी। इसके बाद वनविभाग की रेस्क्यू टीम ने पहुंचकर उसे कब्जे में मिला था। यहां से उसे दौलतपुर विश्राम गृह ले जाया गया था जहां से अगले दिन उसे उपचार के लिए इंदौर चिडि़याघर ले जाया गया था। वहां चिडि़याघर के डॉक्टर उत्तम यादव ने उसका उपचार किया था। इसके बाद उसे 3 सितंबर को फिर दौलतपुर विश्राम गृह भेज दिया गया था जहां करीब दो माह तक उसका उपचार किया गया।

गंभीर वायरस से पीडि़त था

इंदौर में उपचार के दौरान तेंदुए के सेंपल लेकर जांच के लिए जबलपुर भेजे गए थे। वहां से आई जांच में पुष्टि हुई थी कि तेंदुआ एक गंभीर वायरस से पीड़ित है। उसे कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी हो गई थी। वायरस ने उसके दिमाग में अटैक कर दिया था जिससे उसकी याद्दाश्त प्रभावित हुई थी। इंदौर में उपचार के बाद दौलतपुर विश्राम गृह में तेंदुए को पिंजरे में रखकर बोतलें व इंजेक्शन लगाए गए। 15 दिन बोटल चढ़ाने के बाद पानी में दवाई मिलाकर दी गई। स्थानीय पशु चिकित्सक व वन विभाग के कर्मचारियों के प्रयासों व जबलपुर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उसका करीब दो माह उपचार चला। इसके बाद अक्टूबर में उपचार बंद कर दिया गया था। 27 नवंबर को जबलपुर से आए 2 डॉक्टरों के दल ने फिर से तेंदुए के सेंपल लेकर जांच के लिए ले गए थे। इसकी रिपोर्ट शनिवार को आई जिसमें तेंदुए के पूर्ण स्वस्थ होने की पुष्टि हुई।

धीरे-धीरे रंग में आया

शुरुआती दिनों में तेंदुआ बिलकुल सामान्य व्यवहार कर रहा था। उसकी हालत कतई तेंदुए जैसी नहीं थी। इसके बाद उपचार मिलता रहा और धीरे-धीरे वह रंग में आने लगा। उसके खाने में भी समय के हिसाब से बदलाव किए गए। उपचार के बाद स्वस्थ होने के बाद अब तेंदुआ जब दहाड़ मारता है तो 200 मीटर तक उसकी दहाड़ साफ सुनाई देती है।

परिवार के सदस्य जैसा ध्यान रखा

तेंदुए के स्वस्थ होने में चिकित्सकों व वनकर्मियों की उल्लेखनीय भूमिका रही। जब तेंदुआ सोनकच्छ के दौलतपुर विश्राम गृह आया था तो पूरे समय उसका विशेष ध्यान रखा गया। वनकर्मियों ने उसका नामकरण कर उसका नाम रामू रखा। इसके बाद उपचार के दौरान जब तेंदुआ दर्द से झटपटाता था तो रामू आवाज देते ही वह शांत हो जाता था।

ऐसा रहा तेंदुए का सफर

-29 अगस्त को तेंदुआ इकलेरा में मिला।

-30 अगस्त को उपचार के लिए इंदौर चिड़ियाघर ले जाया गया।

-3 सितंबर को वापस दौलतपुर विश्राम गृह भेजा

- 2 माह लगातार चला उपचार

-4 माह बाद आज खिवनी अभ्यारण्य में छोड़ा जाएगा

-जबलपुर से आई तेंदुए की जांच रिपोर्ट में वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुका है। सोमवार को उज्जैन की रेस्क्यू टीम के सहयोग से उसे खिवनी अभयारण्य में छोड़ा जाएगा। अभयारण्य में छोड़ने के बाद टीम तेंदुए की निगरानी करेगी।-डीएस चौहान, रेंजर सोनकच्छ