देवास

आदिम जाति कल्याण विभाग में हुए फर्जीवाड़े की लोकायुक्त ने शुरू की जांच

छात्रावासों की मरम्मत व रंगाई-पुताई में हुआ था भ्रष्टाचार, कलेक्टर ने लोकायुक्त को लिखा था पत्र, थोड़े बहुत काम का लाखों रुपए कर दिया था भुगतान, करीब 2.40 करोड़ मिले थे विभाग को

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Oct 18, 2023
आदिम जाति कल्याण विभाग में हुए फर्जीवाड़े की लोकायुक्त ने शुरू की जांच

देवास. आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में मरम्मत सहित अन्य कार्यों के लिए आई राशि का दुरुपयोग करने के मामले में लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने जांच शुरू कर दी है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने लोकायुक्त को पत्र लिखा था। इसके बाद लोकायुक्त उज्जैन ने भोपाल से अनुमति प्राप्त कर जांच शुरू की। फिलहाल छात्रावास अधीक्षकों व अन्य संबंधितों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।उल्लेखनीय है कि छात्रावासों के लिए आई राशि व फर्जी काम की शिकायत के बाद संबंधित एसडीएम ने छात्रावासों का निरीक्षण किया था। इस दौरान किए जाने वाले कार्य मौके पर नहीं मिले। कलेक्टर के प्रतिवेदन के बाद संभागायुक्त ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक विवेक नागवंशी को निलंबित कर दिया था। छात्रावासों में 80-90 हजार रुपए के कार्य किए गए थे और एक ही ठेकेदार को प्रत्येक कार्य के लिए 4 से 5 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।

48 छात्रावास अधीक्षकों को बुलाया

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर गुप्ता ने मामले में लोकायुक्त जांच के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद उज्जैन लोकायुक्त द्वारा मामले में भोपाल से अनुमति प्राप्त की गई। अनुमति मिलने के बाद लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त द्वारा विभाग के जिला संयोजक को पत्र लिखकर जिले के 48 छात्रावास अधीक्षकों को कथन देने के लिए बुलाया गया है। अलग-अलग तारीखों में छात्रावास अधीक्षकों के बयान लिए जा रहे हैं। साथ ही अन्य संबंधितों के बयान भी लिए जा रहे हैं। जांच के बाद लोकायुक्त टीम द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नहीं मिला था गुणवत्तापूर्ण कार्य

उल्लेखनीय है कि जिले में संचालित अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रावास व आश्रम में परिसंपत्तियों के संधारण व अनुरक्षण कार्य के लिए आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग मप्र से 1 करोड़ 42 लाख 85714 रुपए व आयुक्त अनुसूचित जाति विकास विभाग से 97.95 लाख रुपए का आवंटन प्राप्त हुआ था। इस राशि से छात्रावासों में विभिन्न कार्य करवाए जाने थे। कार्य की प्रगति के लिए संबंधित अनुभाग के एसडीएम ने निरीक्षण किया था। एसडीएम ने अपने प्रतिवेदन में जिले के छात्रावासों के निर्माण, मरम्मत कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं होना पाया था। छात्रावास अधीक्षकों द्वारा किए गए कार्य एवं भु्गतान संबंधित कोई रिकॉर्ड, केशबुक, बिल वाउचर आदि का संधारण नहीं मिला था।

ये कमियां पाई गई थीं

-छात्रावासों के कमरों की छत से बारिश का पानी टपकना व छात्रावासों के लेट-बाथ में नल की टोटियां व स्वच्छता की स्थिति खराब पाई गई थीं।

-बाथरूम में लाइट की व्यवस्था नहीं मिली, भोजन कक्ष में पंखे की व्यवस्था नहीं थी।-कार्य के लिए तकनीकी शाखा से विधिवत रूप से प्राक्कलन तैयार नहीं करवाया गया और न ही उस पर सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी।

मौखिक निर्देश पर किया था एडवांस भुगतान

एसडीएम द्वारा की गई जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि जिला संयोजक आदिम जाति कार्यालय के मौखिक निर्देश पर ठेकेदार को कार्य प्रारंभ होने से पूर्व ही संपूर्ण राशि का भुगतान 2 किश्तों में आरटीजीएस चेक के माध्यम से कर दिया गया था। जांच में यह बात भी सामने आई थी कि ठेकेदार द्वारा छात्रावासों में रंगाई-पुताई व अन्य छोटे मरम्मत कार्य करवाए गए। जांच के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ने प्रत्येक छात्रावास में व्यय लगभग 80-90 हजार रुपए से अधिक का नहीं होना बताया था। जबकि प्रत्येक छात्रावास को लगभग 4 से 5 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई थी। भुगतान की गई राशि में से आधा काम भी मौके पर नहीं किया गया था।

-कलेक्टर के पत्र के बाद हमने प्रकरण भोपाल मुख्यालय भेजा था। वहां से अनुमति मिलने के बाद जांच की जा रही है। छात्रावास अधीक्षकों व अन्य संबंधितों के बयान लिए जा रहे हैं।-सुनील कुमार तालान, डीएसपी, लोकायुक्त उज्जैन

Published on:
18 Oct 2023 12:42 am
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