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रसूलपुर तिराहा… वाहनों का अधिक दबाव, रोज लग रहा जाम, ब्रिज का प्रस्ताव अधर में

हजारों वाहन निकलते हैं दिनभर में, एनएचएआइ को भेजा था प्रस्ताव लेकिन नहीं मिली हरी झंडी, इंदौर रोड को बायपास से जोड़ता है तिराहा  

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रसूलपुर तिराहा... वाहनों का अधिक दबाव, रोज लग रहा जाम, ब्रिज का प्रस्ताव अधर में

रसूलपुर तिराहा... वाहनों का अधिक दबाव, रोज लग रहा जाम, ब्रिज का प्रस्ताव अधर में

देवास. शहर के रसूलपुर तिराहा पर दिनभर में कई बार जाम के हालात निर्मित हो रहे हैं। यहां यातायात का दबाव अधिक है और ब्रिज की सख्त जरूरत है। पूर्व में यहां ओवरब्रिज निर्माण के लिए प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा गया था लेकिन उसे आज तक हरी झंडी नहीं मिली। ऐसे में रोज खासकर सुबह व शाम के समय यातायात का दबाव होने से जाम लग रहा है। कई बार हालात ऐसे होते हैं कि लोहारपिपल्या तक वाहनों की लाइन लग जाती है।

उल्लेखनीय है कि इंदौर रोड से भोपाल बायपास पर जाने वाले वाहनों की संख्या हजारों में रहती है। भोपाल, ग्वालियर की ओर जाने वाले वाहन इसी तिराहे से निकलते हैं। ऐसे में शहर से इंदौर की ओर जाने वाले वाहनों और इंदौर की ओर से बायपास पर जाने वाले वाहनों को तिराहा क्रॉस करते समय रुक-रुककर निकलना पड़ता है। इस दौरान कई बार हादसे की आशंका भी रहती है। कई बार वाहन गुत्थमगुत्था भी होते हैं।

बायपास बनाते समय नहीं दिया ध्यान

उल्लेखनीय है कि करीब 20 वर्ष पहले इंदौर रोड को फोरलेन किया गया था। इसके साथ ही देवास में टू-लेन बायपास बनाया गया था। उस समय इस तिराहे पर भविष्य को देखते हुए ब्रिज निर्माण नहीं किया गया। इसके बाद इंदौर रोड सिक्सलेन हुआ लेकिन इसमें भी ब्रिज का प्रावधान नहीं किया गया। करीब चार साल पहले देवास बायपास को रसूलपुर से भोपाल चौराहा तक सिक्सलेन किया गया लेकिन इसमें भी रसूलपुर तिराहे पर ब्रिज का प्रावधान नहीं किया गया।

43.74 करोड़ का प्रस्ताव बनाया था

उल्लेखनीय है कि पूर्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इंदौर दौरे के समय विधायक गायत्रीराजे पवार ने विभिन्न कार्यों के लिए प्रस्ताव सौंपे थे। इसमें रसूलपुर तिराहा पर 550 मीटर लंबे ओवरब्रिज का प्रस्ताव भी शामिल था। यह प्रस्ताव करीब 43.74 करोड़ रुपए का था। प्रस्ताव एनएचएआई के माध्यम से दिल्ली भी पहुंचा लेकिन आज तक इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली।

कांग्रेस सरकार में भी हुई थी कवायद

उल्लेखनीय है कि 2018 में कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जनसिंह वर्मा के कार्यकाल में रसूलपुर तिराहा पर ब्रिज निर्माण की कवायद हुई थी। सेतु निगम के अफसरों ने मौका मुआयना भी किया था लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

नहीं रहते पुलिसकर्मी

बायपास का सबसे व्यस्त तिराहा होने के बाद भी यहां यातायात पुलिस के जवान तैनात नहीं रहते हैं। जाम के समय औद्योगिक थाने का स्टाफ या डायल-100 में तैनात पुलिसकर्मी ही व्यवस्था संभालते हैं। जाम के समय सबसे ज्यादा लंबी लाइन इंदौर से आने वाले रोड पर होती है। कभी कभी तो वाहनों की लाइन लोहारपिपल्या से आगे तक चली जाती है।

सिंहस्थ के कार्यों में किया शामिल

उधर तिराहे पर ब्रिज निर्माण के कार्य को सिंहस्थ-2028 के कार्यों में शामिल किया गया है। ऐसे में एक बार फिर उम्मीद बंधी है कि यातायात के दबाव को देखते हुए सिंहस्थ मद में यहां ब्रिज का निर्माण हो सकता है। उधर नगर निगम ने भी ब्रिज के अलावा आसपास होने वाले कार्यों के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया है।

फैक्ट फाइल-

-7000 से ज्यादा वाहन निकलते हैं दिनभर में

-3 रास्ते मिलते हैं यहां

-43 करोड़ से ज्यादा का प्रस्ताव है ब्रिज के लिए

प्रस्ताव भेजा है

-रसूलपुर चौराहा पर ब्रिज के लिए प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा जा चुका है। सिंहस्थ को लेकर तैयार की गई कार्य योजना में भी इसे शामिल किया गया।

-ऋषव गुप्ता, कलेक्टर

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