- विडंबना यह है कि दुर्घटना पन्द्रह मिनट के बाद ही इस मार्ग में जगह-जगह वाहनों को खड़ी कर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ दी गई। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो दिन पहले सड़क में ट्रैफिक को कंट्रोल करने उतरे एसपी की मेहनत कितनी सफल हुई है।
शहर से गुजरने वाली हाइवे रविवार को फिर खून से लाल हो गई। ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार ओमप्रकाश अग्रवाल (62) की मौत हो गई। एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। यह दुर्घटना शहर के सबसे व्यस्त मकई चौक में हुई। विडंबना यह है कि दुर्घटना पन्द्रह मिनट के बाद ही इस मार्ग में जगह-जगह वाहनों को खड़ी कर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ दी गई। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो दिन पहले सड़क में ट्रैफिक को कंट्रोल करने उतरे एसपी की मेहनत कितनी सफल हुई है।
रविवार को शाम साढ़े 6 बजे अपने ससुर को देखने के लिए गुप्ता हास्पिटल जा रहे ओमप्रकाश अग्रवाल को यह मालूम नहीं था कि घर से कुछ ही दूर के फासले में ही मौत उसका इंतजार कर रही है। शहर के सबसे व्यस्त मकई चौक में एक तेज रफ्तार ट्रक क्रमांक सीजी 04 जेसी-5078 ने उसे अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सिग्नल खुलने पर वह अपनी स्कूटी से जैसे ही रत्नाबांधा की ओर मुड़ा तो वाहन अनियंत्रित होकर ट्रक के अंदर घुस गई। पिछला चक्का ओमप्रकाश अग्रवाल के ऊपर से चढ़ गया। इस दुर्घटना में स्कूटी चालक गनपत अग्रवाल दूर फेंका गया। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ इकठ्ठी हो गई। आक्रोश भड़कता इसके पहले ही ट्रैफिक पुलिस वाले ने एक वाहन में बैठाकर उन्हें जिला अस्पताल ले आया। यहां डाक्टरों ने ओमप्रकाश अग्रवाल को मृत घोषित कर दिया।
उधर, घटना की सूचना मिलने के बाद शहर के प्रतिष्ठित रतनलाल दयाराम अग्रवाल परिवार में मातम छा गया। अस्पताल में परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। आम नागरिकों का कहना था कि त्यौहारी सीजन मेें सड़क में ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद भारी वाहनें बेधड़क तेज रफ्तार से चल रही है। शायद प्रशासन को और मौतों का इंतजार है। इस दुर्घटना के 15 मिनट के बाद जब पत्रिका संवाददाता घटनास्थल पर पहुंचा तो देखा कि एक ट्रैफिक पुलिस सिपाही ट्रैफिक पाइंट पर खड़ा हुआ था। भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी हुई थी। रायपुर रोड में कुछ दूर आगे जब बढ़ा तो देखा कि मजार के सामने स्थित एक चाट दुकान में लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी। ये लोग अपने वाहनों को नेशनल हाइवे में खड़ा कर दिए थे, जिससे लोगों को आने-जाने में तकलीफ हो रही थी। कुछ दूर और आगे पहुंचा तो लक्ष्मीचंद बारदाना वाले के सामने में तीन लोगों ने अपनी वाहन को हाइवे में खड़ा कर दिया। चंद दूरी में ही एक दुकान में पिकअप से सामान उतारा जा रहा था। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में किस तरह से पुलिस की उदासीनता का फायदा उठाते हुए ट्रैफिक नियमों की धज्जिया उड़ाई जा रही है।
व्यवस्था की खुली पोल
गौरतलब है कि दो दिन पूर्व ही 14 अक्टूबर को एसपी प्रशांत ठाकुर ने अधिकारियों की एक टीम के साथ इस मार्ग का निरीक्षण कर सिहावा चौक से मकई चौक के बीच रबर स्ट्रीप, स्टाप लाइन, जेब्रा क्रांसिग कीट, रोड मार्किंग कैट आई लगाने एवं आसपास से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। और तो और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए 5 जगह पर पार्किंग पाइंट भी बनाया गया। इसके बावजूद भी व्यवस्था की पोल खुल गई।
भारी वाहनों पर लगाम नहीं
त्यौहारी सीजन में सड़कों में भीड़ बढ़ गई है। इसके बावजूद भी भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई गई है। शहर में सुबह 10 बजे से लेकर 12 बजे तक और शाम 5 बजे से लेकर 8 बजे तक लोगों की ज्यादा भीड़ रहती है। पूर्व में मांग की गई थी कि सुरक्षा की दृष्टि से भारी वाहनों को जोधापुर चौक से गोकुलपुर,ब्रम्ह चौक, बिलाईमाता, दानीटोला होकर सिहावा चौक की आवाजाही सुनिश्चित की जाए, लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
आखिर क्यों दी गई छूट
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस मार्ग में सुबह से लेकर देर रात तक करीब 250 से ज्यादा निजी बसें चलती है। देखा गया है कि कुछ नामचीन कंपनियों की बड़ी यात्री बसें प्रतिस्पर्धा के चलते बेलगाम होकर चलती है। जहां मर्जी होती है, वहां खड़ी कर सवारी भरते रहते हैं। इस वजह से भी दुर्घटनाओं में काफी इजाफा हो रहा है। नागरिकों का सीधा आरोप है कि यात्री बस मालिकों के साथ पुलिस की सांठगांठ होने के कारण ही उन्हें छूट दी गई है।
बाइपास के अभाव में जा रही जान
टै्रफिक पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष-2017 से लेकर 16 अक्टूबर तक की स्थिति में जिले में 1790 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 4 सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मौत का यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। इसकी एक वजह बाइपास के निर्माण कार्य में विलंब भी है। पूर्व में धमतरी कलेक्टर ने संबंधित कंपनी को अल्टीमेटम दिया था कि 30 जून तक बाइपास का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके बावजूद भी यह काम अधूरा है।