
धमतरी. देश में वर्ष-2018-19 के नए वित्तीय वर्ष से इंटर स्टेट ई-बिल लागू कर दिया गया है। अब 50 हजार से अधिक का माल दूसरे राज्य से आयात या निर्यात करने पर व्यापारियों या ट्रांसपोर्टर को ऑनलाइन बिल अपलोड करना होगा। इस बिल के लागू होने से टैक्स की चोरी जरूर रूकेगी।साथ ही व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। व्यपारियों ने बताया कि जीएसटी के चलते पहले ही काम बढ़ा हुआ है। अब ई-वे बिल से वर्कलोड और बढ़ जाएगा।
ई- वे बिल के तहत अब अन्य राज्यों से किसी प्रकार का भी माल मंगाने पर व्यापारियों या ट्रांसपोर्टर को पोर्टल पर माल का बिल अपलोड करना होगा। इसके बाद वे इसका परिवहन कर सकेंगे। यदि बिना ई-वे बिल के माल पकड़ा जाता है तो उन पर पांच गुना ज्यादा फाइन लगेगा।
क्या है ई- वे बिल
इसका प्रारूप सामान्य बिल जैसा ही है। लेकिन व्यापारियों को खरीदी-बिक्री के समय इसे सर्वर पर अपलोड करना होगा। इसमें वाहन का नम्बर, माल की जानकारी, जीएसटी नम्बर, के्रता का नाम उल्लेखित रहेगा। ई-वे बिल में व्यापारियों के साथ ट्रांसपोर्टरों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। यदि बिना ई-वे बिल के वे कोई माल परिवहन करते हुए पकड़े गए तो वाहन के साथ माल भी जब्त किया जा सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञ आरके शर्मा का कहना है कि इससे टैक्स चोरी और कालाबाजारी जरूर रूकेगी, लेकिन इसके साथ व्यापारियों की परेशानी और बढ़ जाएगी। उन्हें खरीदी और बिक्री करते समय ई-वे बिल का प्रोसेस कम्पलीट करना होगा। इससे उनका वर्कलोड बढ़ेगा।
समय की पाबंदी
ई-वे बिल में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए टाइम लिमिट तय की गई है। माल का परिवहन 100 किमी करना है, तो उसके लिए एक दिन निर्धारित है। इसके बाद ई-वे बिल लैप्स हो जाएगा और व्यापारियों को फिर से बिल लेना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार हर 100 किमी के लिए एक दिन का समय निर्धारित है। यह बिल मोबाइल या कम्प्यूटर से प्राप्त किया जा सकता है।
कर सलाहकार महेश शर्मा का कहना है कि इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होने से व्यापारियों पर वर्क लोड बढ़ जाएगा। सर्वर डाऊन होने की स्थिति में उनकी भी परेशानी और बढ़ सकती है।
Updated on:
04 Apr 2018 01:36 pm
Published on:
04 Apr 2018 11:13 am
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