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शिवलिंग पर दूध चढ़ाते ही रंग हो जाता है नीला, जानिए भीमा कोटेश्वर धाम की अद्भुत कहानी

Wonderful Story of Shivling Bhima Koteshwar Dham: छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक ऐसा शिवलिंग है जिसकी पूजा खुद लंकापति रावण करते थे। साथ ही उसके कई पूर्वज भी इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने यहां आते थे।

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अखिल शर्मा @ धमतरी। रावण के बारे में सिर्फ हिंदुस्तान में ही नही बल्कि और भी कई देशों में चर्चाएं होती हैं। लेकिन आज हम लंकापति रावण से जुड़ी एक खास कहानी के बारे में आपको बताएंगे। दावा किया जाता है की छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक ऐसा शिवलिंग है जिसकी पूजा खुद लंकापति रावण करते थे। साथ ही उसके कई पूर्वज भी इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने यहां आते थे।

इतना ही नहीं, कहा जाता है की इस शिवलिंग में साक्षात भगवान नीलकंठेश्वर का वास है। जिसके कारण शिवलिंग पर दूध चढ़ने से दूध का रंग नीला पड़ जाता है। हैरान कर देने वाली इस कहानी के बारे में विस्तार से जाने।

छत्तीसगढ़ की राजधानी से करीब 150 किलोमीटर दूर धमतरी के सिहावा के घने जंगलों में स्थित है भगवान भोलेनाथ का यह भीमा कोटेश्वर धाम। (Wonderful Story of Shivling Bhima Koteshwar Dham) शिवलिंग के आसपास न कोई दीवार न कोई छत खुले आसमान के नीचे यहां भोलेनाथ विराजमान हैं। आबादी के नाम पर भी केवल कुछ पुजारी जो सुबह और शाम के वक्त भोलेनाथ की पूजा करने आते हैं। भोलेनाथ के इस अद्भुत शिवलिंग को देखने दूर दूर से लोग आते हैं। तथा पूजा अर्चना करते है।

धाम के एक पुजारी ने बताया कि सागर मंथन से जब विष निकला था तब संसार को महाप्रलय से बचाने महादेव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। जिसके कारण महादेव का कंठ नीला पड़ गया। और तब से महादेव को नीलकंठ कहा जाता है। पुजारियों ने बताया कि यह वही नीलकंठेश्वर महादेव का रूप है जो यहां विराजमान है। जिसके कारण इसमें दूध चढ़ाने से दूध का रंग नीला पड़ जाता है।