31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

World Tourism Day 2021: धमतरी पर प्रकृति मेहरबान, सैलानियों को पसंद आ रहे ये टूरिज्म स्पॉट

World Tourism Day 2021: प्रकृति ने धमतरी पर खूब मेहरबानी की है। यही कारण है कि पर्यटन की दृष्टि से अब गंगरेल बांध क्षेत्र छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के मानचित्र पर तेजी से उभरने लगा है। यहां वाटर स्पोटर्स के अलावा एडवेंचर भी है।

3 min read
Google source verification

धमतरी

image

Ashish Gupta

Sep 27, 2021

water_sports.jpg

धमतरी. World Tourism Day 2021: प्रकृति ने धमतरी पर खूब मेहरबानी की है। यही कारण है कि पर्यटन की दृष्टि से अब गंगरेल बांध क्षेत्र छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के मानचित्र पर तेजी से उभरने लगा है। यहां वाटर स्पोटर्स के अलावा एडवेंचर भी है। यहां चारों तरफ फैली हरियाली सैलानियों को काफी बेहद रोमांचित करती है। रोजाना बड़ी तादात में सैलानी गंगरेल बांध क्षेत्र के नजारों को निहारने के लिए पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि कुदरत ने अपने खजाने से गंगरेल बांध क्षेत्र पर अपनी खूबसूरती खूब लुटाया है।

जिला मुख्यालय से 8 किमी की दूरी पर छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे खूबसूरत और वृहद गंगरेल बांध हैं। यह महानदी पर बना हुआ है। इसका निर्माण 1978 में हुआ है। लबालब पानी भरने पर 14 गेट के माध्यम से महानदी में पानी छोड़ा जाता है। बांध के पूर्व दिशा में बड़े-बड़े पहाड़ियों की श्रृंखला है, जो हरियाली से अच्छादित है। पहले यहां पर्यटन की दृष्टि से कुछ भी नहीं था। सैलानी सिर्फ बांध को देखकर लौट जाते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां काफी बदलाव आया है। अब तो बांधों के एक किनारे से दूसरे किनारे तक ट्यूबलर लाइट लग गई है।

इसके अलावा सुंदर गार्डन का निर्माण भी किया गया है। अप-स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में व्यू पाइंट बनाने के साथ ही एक नया सुंदर गार्डन भी बनाया गया है। यहां रंगीन फौव्वारों से इसकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रहा है। यहां ठहरने के लिए मोटल भी बनाया गया है। इसलिए बांध और उसके चारों तरफ की प्राकृतिक नजरों को आंखों में कैद करने के लिए देश के अलावा विदेेशों से भी सैलानी भी बड़ी संख्या में हर साल आते हैं। 32 टीएमसी की क्षमता वाले बांध के ऊपर से जब पानी छलकने लगता है, तो सैलानी रोमांचित हो जाते हैं।

वाटर बाइक का रोमांच
गंगरेल बांध में वॉटर स्पोट्र्स के अंतर्गत पैरासीलिंग, प्लायबोर्ड, ऑकटेन, जार्बिन बॉल, पीडब्ल्यूसी बाइक, बनाना राईड, 100 सीटर शिप, वॉटर सायकल, कयाक, पायडल बोट्स आदि का लुत्फ सैलानी भी उठा रहे हैं। सालभर के भीतर यहां वाटर स्पोर्ट्स को लेकर सैलानियों में जो उत्साह बढ़ा है, वह देखते ही बनता है। बांध के गहरे पानी में फर्राटे भरते पीडब्ल्यूसी बाइक का रोमांच ही अलग है।

आवागमन की सुविधा
गंगरेल बांध ऐसी जगह स्थित है, जहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। रायपुर, बालोद, दुर्ग, जगदलपुर समेत अन्य मार्गों से आने वाले सैलानियों के लिए साधन उपलब्ध रहता है। बस स्टैंड और जोधापुर चौक से बस, आटो का आना-जाना दिनभर गंगरेल तक लगा रहता है। किराया भी बहुत कम है। आना-जाना सिर्फ 20 रुपए में हो जाता है। आवागमन को लेकर यहां कोई समस्या नहीं है। सिटी बस और आटो से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

खूब लुभाते हैं वुडन हर्ट
दूरदराज से आए सैलानियों की सुविधा के लिए गंगरेल में लाखों रुपए खर्च कर वुडन हर्ट बनाया गया है। यहां जर्मन लकड़ी से 12 कॉटेज और रेस्टोरेंट बनाया गया है, जिसका लाभ भी सैलानी उठा रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत् ट्रायबल टूरिज्म सर्किट में प्रदेश के जशपुर-कुनकुरी-मैनपाट-कमलेश्वरपुर-महेशपुर-कुरदर-सरोधादादर-गंगरेल-कोंडागांव-नथियानवागांव-जगदलपुर-चित्रकोट-तीरथगढ़ सहित 13 प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा। परियोजना के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा 99 करोड़ रुपए मंजूर किया हैं। इन पर्यटन केन्द्रों में एथनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के अंतर्गत लॉग हट्स, कैफेटेरिया, गार्डन, पगोड़ा, पार्किंग एवं वॉटर स्पोट्र्स विकसित किया जाएगा।

नरहरा जलप्रपात भी लुभा रहा
धमतरी जिला मुख्यालय से नरहरा झरना 36 किमी दूर है। कुकरेल से बनबगौद, झुरातराई, कोटरवाही होते हुए 5 किमी दूर जंगल के रास्ते से नरहरा पहुंचते हैं। बीच में लगभग 3 किमी तक मुरूम बिछाई गई है। घने जंगल से होकर झरना तक लोग पहुंच रहे हैं। यहां सैलानियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला पंचायत द्वारा इसे मनरेगा योजना के तहत पिकनिक स्पॉट बनाने सुविधाएं जुटाना शुरू कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि नरहरा धाम में झरना के ठीक पीछे गुफा के अंदर नरहरेश्वरी माता की मूर्ति स्थापित है। मंदिरनुमा इस गुफा की छत चट्टान से आच्छादित है। ग्रामीण इसे वनदेवी भी कहते हैं।

(अब्दुल रज्जाक की रिपोर्ट)

Story Loader