-वृद्ध की फरियाद सुन कार से घर छोडऩे पहुंचे कलेक्टर प्रियंक मिश्रा-वृद्धा की मदद के लिए पहुंचे थे जनसुनवाई, कलेक्टर को बताई अपनी समस्या
धार. क्रांतिकारियों के साथ कदमताल कर आंदोलनों में भाग लेने वाले व नगर सुरक्षा समिति को अस्तित्व में लाने वाले संस्थापक को एक राज्य स्तरीय सम्मान पाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाना पड़ रही है। मंगलवार को गोपालराव दुबे(८८) जनसुनवाई में पहुंचे। दरअसल दुबे यहां पर एक वृद्ध महिला की समस्या लेकर पहुंचे थे। इस बीच उन्होंने भी अपने सम्मान का आवेदन अधिकारियों के समक्ष रखा। चूंकि सम्मान का आवेदन जनसुनवाई में स्वीकार नहीं हो सकता। ऐसे में दुबे को लौटना पड़ा।
इसके बाद जब जनसुनवाई खत्म होने के बाद कलेक्टर प्रियंक मिश्रा बाहर निकले और जाने लगे तो उनकी नजर वृद्ध दुबे पर पड़ी। उन्होंने दुबे को अपनी कार में बैठाया और साथ लेकर दुबे के घर पहुंच गए। इस बीच दुबे से बात कर उनकी सुनवाई की। दुबे गांधी कॉलोनी में रहते है, जहां पर कलेक्टर मिश्रा ने दुबे के साथ पहुंचकर परिजनों से बात की। इसके बाद कलेक्टर मिश्रा ने दुबे का नाम राज्य स्तरीय सम्मान के लिए करने का प्रस्ताव भिजवाने की बात कही। साथ ही परिजनों को भी जरूरी मदद देने का आश्वासन दिया।
वर्ष-1955 में की थी शुरूआत
दरअसल गोपालराव दुबे ही नगर सुरक्षा समिति को अस्तित्व लाने वाले है, जिन्होंने सबसे पहले वर्ष-१९५५ में धार में सुरक्षा समिति बनाई थी। इस पैटर्न पर पूरे प्रदेश में यह मॉडल लागू हुआ। इसके लिए दुबे को हैडकांस्टेबल की वर्दी मिली है। लेकिन आर्थिक तौर पर कोई सहायता नहीं मिल पाई। ऐसे में दुबे का परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। मदद के तौर पर दुबे को सिर्फ वृद्ध पेंशन के तौर पर ६०० रुपए प्रतिमाह मिलते है। अब दुबे को राज्य स्तरीय सम्मान पाने के लिए भी गुहार लगाना पड़ रही है।
प्रशासन के लिए काफी काम किया
इसके बाद कलेक्टर प्रियंक मिश्रा अपने साथ लेकर दुबे को उनके घर छोडऩे पहुंचे। यहां पर कलेक्टर मिश्रा ने बताया जनसुनवाई में वृद्ध दुबे ने अपने द्वारा किए गए कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने प्रशासन के लिए काफी काम किया है। जनसुनवाई में बात नहीं हो पाई थी इसलिए उन्हें घर छोडऩे के बहाने उनसे बात हुई है। उनकी पारिवारिक जरूरतों को लेकर भी संज्ञान लिया है। साथ ही राज्य स्तरीय सम्मान के लिए भी प्रस्ताव भिजवाया जाएगा।