21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संस्कृति के पतन को रोकने के लिए गुरुकुल शिक्षा पध्दति की आवश्यकता है-नर्मदानंद बापजी

संस्कृति के पतन को रोकने के लिए गुरुकुल शिक्षा पध्दति की आवश्यकता है-नर्मदानंद बापजी

2 min read
Google source verification

धार

image

sarvagya purohit

Jul 18, 2019

Demand for a case against the contractor

संस्कृति के पतन को रोकने के लिए गुरुकुल शिक्षा पध्दति की आवश्यकता है-नर्मदानंद बापजी


पत्रिका एक्सक्लूसिव
सर्वज्ञ पुरोहित
धार.
प्राचीन काल में संस्कृति और धर्म की ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरुकुल हुआ करते थे। जहां पर शिक्षा लेने वाले छात्र उस शिक्षा को प्राप्त करते थे, जिससे वे समाज हित और राष्ट्र निर्माण के कार्य कर सके। वर्तमान समय में हम लोग पाश्चात्य सभ्यता की ओर अंध गति से दौड़ रहे है और अपनी ही संस्कृति का पतन कर रहे है। आज देश में अपनी संस्कृति के पतन को रोकने के लिए गुरुकुल शिक्षा पध्दति की आवश्यकता है। बड़ा सवाल यह है कि ये कैसे शुरू हो?, जवाब यह है कि समाज का प्रतिष्ठित वर्ग उदाहरण के लिए आईएएस, आईपीएस, विधायक, सांसद अपने बच्चों को शिक्षा लेने के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाए। उनका यह कदम समाज में प्रेरणा का कार्य करेगा और निम्न से निम्न वर्ग के लोग भी इससे प्रभावित होंगे। परिणाम यह होगा कि पाश्चात्य संस्कृति से ओत प्रोत कॉन्वेंट स्कूलों को छोड़ लोग अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे। यही सरकारी स्कूल गुरुकुल का रूप ले लेंगे। उक्त बातें श्रीश्री १००८ राजानंद बापजी के शिष्य नर्मदानंद बापजी ने पत्रिका से विशेष चर्चा में कही।
बुधवार को श्रीश्री १००८ राजानंद बापजी के शिष्य नर्मदानंद बापजी धार शहर के नित्यानंद आश्रम में आए थे। इस दौरान उन्होंने पत्रिका से विशेष चर्चा की।
शिष्य में तीन गुण होना आवश्यक
श्रीश्री १००८ राजानंद बापजी के शिष्य नर्मदानंद बापजी ने बताया कि एक अच्छे शिष्य में संस्कार, समर्पण और सत्यता तीन गुणों का होना बेहद आवश्यक है। यदि एक शिष्य में यह तीन गुण होते है तो गुरु द्वारा की गई मेहनत चाहे वह किसी भी विधा से जुड़ा हुआ है वह सफल होती है। इसे गुण एक शिष्य में होते है तो वह कभी कुमार्ग या फिर नशे के पीछे नहीं जाएगा। आजकल की युवा पीढ़ी नशे की पीछे दौड़ रही है जो कि युवाओं को कुमार्ग की ओर धकेल रही है। नशे पर लगाम लगाने बेहद आवश्यक हो चला है।
परमात्मा को महसूस कर सकते है
नर्मदानंद बापजी ने कहा कि परमात्मा के मिलने के लिए जीवन में गुरु का होना बेहद आवश्यक है। गुरु ही ऐसा माध्यम से जो अच्छे मार्ग पर चलने की राह प्रदान करता है। वहीं भगवान का मिलन किस प्रकार होता है इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हवा को महसूस किया जाता है उसकी प्रकार परमात्मा को महसूस कर सकते है। परमात्म हर समय आपके आसपास ही रहते है बस आपको जरूरत है कि आप परमात्मा को महसूस करें।