
मनुष्य संगीत से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है
सर्वज्ञ पुरोहित
धार.
धार शहर यूं तो खेल के क्षेत्र में बेडमिंटन की नर्सरी के नाम से जाना जाता है। लेकिन विगत कुछ सालों में शहर ने खेल के अलावा कई विधाओं में अपना नाम रोश किया है। वहीं बात जब संगीत आए तो इसे कैसे भूल सकते है। संगीत सिर्फ 7 सुरों में बंधा नहीं होता है। इसकों बांधने के लिए विश्व की सीमाएं भी कम पड़ जाती है। वहीं संगीत दुनिया में हर मर्ज की दवा है। संगीत में शहर के कई ऐसे कलाकार है जिन्होंने संगीत के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है। आज विश्व संगीत दिवस है और इन कलाकारों ने बताया कि संगीत हर मनुष्य के लिए आवश्यक है या यूं कहे संगीत ऐसा माध्यम से जिसकी साधना से मनुष्य ईश्वर को प्राप्त कर लेता है। आज छोटा से बड़ा व्यक्ति क्यों न हो वह संगीत से किसी भी प्रकार से जुड़ा रहता है। पत्रिका रिपोर्टर ने संगीत दिवस पर कुछ कलाकारों से संगीत क्या और व्यक्ति के जीवन में क्या महत्व रखता है उसके बारे में जाना।
संगीत से मनुष्य ईश्वर को प्राप्त करता है
नाम- श्वेता जोशी
विधा-शास्त्रीय/ भक्ति/ सूफी गायन
मंचीय प्रस्तुति- १०० से अधिक
गायिका श्वेता जोशी ने धार शहर का नाम प्रदेश ही नहीं पूरे देश में अपने गायन से श्रोताओं के दिल में एक अलग पहचान बनाई है। गायिका श्वेता जोशी की बात करें यूं वह बचपन से संगीत से जुड़ी हुई है और नियमित गायन की रियाज करती है। गायिका जोशी गुरु पंडित लक्ष्मीकांत जोशी से संगीत की तालिम ले रही है। उनका कहना है कि संगीत से मनुष्य आध्यात्म की ओर बढ़ता है और यह मेडिटेंशन का सबसे अच्छा साधन है। संगीत के माध्यम से मनुष्य ईश्वर को प्राप्त कर लेता है और संगीत सभी लोगों के आवश्यक है। अभी हाल ही मैं उत्तर प्रदेश में ताज महोत्सव में प्रस्तुति देकर आई वह मेरा स्टेज शो काफी यादगार रहा। यहां पर जब मैंने प्रस्तुति दी तो यहां के श्रोताओं के अलावा विदेशी श्रोताओं से जो प्रतिसाद मिला था उस देखकर मैं मुग्ध रह गई थी। यह पल आज भी मेरे जहन में है।
मतदान के गीत किया कंपोज
नाम-सोमतसिंह चिडार
विधा-वोकल गायक
मंचीय प्रस्तुति-१२५
गायक और लेक्चरार सोमतसिंह चिडार यूं तो दिव्यांग है। इसके साथ ही वह धार के संगीत महाविद्यालय में लेक्चरार है। उन्होंने मतदान के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए दो अलग-अलग गीत कंपोज किए थे। सोमतसिंह चिडार ने इस गीत को गायका और उनकी टीम ने इसमें संगत दी। उन्होंने विधानसभा के लिए मतदान करो मतदान करो और १९ मई का दिन रविवार का प्यार, मतदान करो गाया। यह गीत शहर की जनता की जुबान पर आज भी बरकरार है। इन गीतों के साथ गाय नके लिए तात्कालीन कलेक्टर दीपक सिंह ने सम्मानित भी किया। लेक्चरर और गायक सोमतसिंह चिडार कहते है कि मैं संगीत से बचपन से जुड़ा हुआ है। यूं तो मेरी संगीत की दीक्षा भोपाल में हुई है और मैं धार के संगीत महाविद्यालय में संगीत सीखाता हूं। मैंने कई प्रस्तुतियां संगीत की दी है और बाहर जितने भी परफार्मेंस दिए है वह सभी मेरे यादगार पल है। चुनाव जनता को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए दो गीत कंपोज किए जिसे मैंने और मेरे विद्यार्थियों या यूं कहे टीम ने गाया।
युवा में धैर्य की कमी
नाम-दीपक खलतकर
विधा-तबला, हारमोनियम, वायलिन और बांसुरी
मंचीय प्रस्तुति-४०
दीपक खलतकर यूं तो पेशे से शिक्षक है। संगीत की तालिम उन्हें अपने पिता से मिली। बचपन से ही उनकी संगीत में रूचि थी। कलाकार खलतकर तबला, हारमोनिय, वायलिन और बांसुरी के गुर तो सीखे है। साथ ही उन्होंने गायन की तालिम भी ली है। उनका संगीत के विषय में बताया कि संगीत आत्मा को शांति प्रदान करता है। संगीत ऐसा माध्यम है जो मन को शांत रखता है। कलाकार खलतकर का मानना है कि संगीत के क्षेत्र में जिस प्रकार युवा पीढ़ी आ रही है उनमें धैर्य कम नजर आता है। संगीत में सबसे महत्वपूर्ण है धैर्य। धैर्य से आप जग जीत सकते हो। कलाकार खलतकर ने से जब उनके यादगार प्रस्तुति के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन मुंबई और कोलकता में जब मैंने प्रस्तुति दी तो काफी श्रोताओं ने दादा बटोरी। यह जीवन का वह पल था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता हूं।
Published on:
21 Jun 2019 10:44 am
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