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ऐसे में कैसे बचेगी, कैसे पढ़ेगी बेटी?

मनावर में मासूमों के साथ हुए दुष्कर्मों से व्यथित है महिलाएं, एक ही स्वर में कहा- दरिंदों को हो सजा-ए-मौत देने से बनेगा भय का माहौल

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धार

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Arjun Richhariya

Dec 22, 2017

girls safety

प्रीतम लखवाल.धार. मनावर में १५ दिसंबर को 4 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद निर्ममता से की गई हत्या और १९ दिसंबर को ७ साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी ने समाज, कानून और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। इससे सबसे अधिक व्यथित महिलाएं हैं। अंतरमन में इतनी वेदना है कि समाज में रह रहे ऐसे हैवानों के लिए सजा-ए-मौत से कमतर सजा नहीं चाहतीं। जल्द से जल्द न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर मासूमों की जिंदगी से खिलौना दुष्कृत्य करने वाले आरोपितों को सजाएं दिलवाने की पक्षधर हैं।

इसी वर्ग की आवाज है कि समाज, व्यक्ति के साथ-साथ परिवार भी जागरुक हो। सरकार द्वारा बनाए गए बाल अधिकारों, कानूनों का सख्ती से पालन हो। सतत् ऐसे इलाकों में जागरुकता अभियान चलाने की दिशा में काम होना चाहिए, जहां अशिक्षा का अंधकार है। बेटियों को समाज भी सुरक्षा व परिवार भी दे और पुलिस भी। मनावर में हुई इन दो दिल दहला देने वाली वारदातों को लेकर 'पत्रिका' ने समाज के ऐसे वर्ग की महिलाओं से बातचीत की, जो बेटियों के लिए हमेशा सजगता का पाठ पढ़ाती हैं।

बालिकाओं को करें जागरुक, १०९८ पर करें फोन
सरकार की ओर से बालिका सुरक्षा के लिए बनाई गई हेल्प लाइन १०९८ पर फोन करने के लिए बालिकाओं को प्रेरित किया जा रहा है। उनके साथ हो रही हरकतों के प्रति माता-पिता को समझाइश की जानी चाहिए। बच्चियों को बताया जाए कि कोई भी उन्हें प्रलोभन दे, गलत तरीके से छुए तो तुरंत परिजन को बताए। बच्चियों को हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दें।

बेटियों को हर स्तर पर मिले सुरक्षा
मनावर की दोनों मासूमों के साथ हुए दुष्कर्म की घटना ने समाज में ऐसे घिनौनी मानसिकता के शिकार लोगों के चेहरे सामने ला दिए हैं। इनको माफ नहीं किया जा सकता। कड़े कानून बनें। जल्द न्याय हो। समाज, परिवार व कानून की ओर से बेटियों को पूरी तरह सुरक्षा मिले। दोषियों को सजाए मौत का प्रावधान हो, तभी भय पैदा होगा। ऐसे अपराध रुकेंगे।
-तृप्ति मिश्रा, कार्यक्रम अधिकारी, रासेयो, उत्कृष्ट विद्यालय

सिर्फ मौत की हो सजा
मनावर की घटनाओं से बहुत व्यथित हूं। ऐसी मासूम जिनके खेलने की उम्र होती है, उनके साथ इस तरह की हैवानियत को रोकने के लिए कोर्ट को जल्द न्याय करके दरिंदों को मौत की सजा सुनाई जाए। कड़े कानून बनाए जाएं। माता-पिता के साथ समाज में भी जागरुकता लाई जानी महत्ती जरूरत है। बेटियों को बचाने और पढ़ाने का अभियान तभी सफल होगा।
शालिनी दुबे, एनसीसी अधिकारी, (गल्र्स विंग), उत्कृष्ट विद्यालय

समाज भी हो जागरुक
यह बहुत ही निर्ममता और कलंकित करने वाले अपराध हुए हैं। समाज के हर वर्ग, परिवार के साथ माता-पिताओं को बेटियों की सुरक्षा के जागरुक होना पड़ेगा। कोर्ट में ऐसे मामलों में जल्द चालान पेश हो जाए तो पीडि़त पक्ष को जल्द न्याय मिल जाए। कानून अपना काम कर रहा है। बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हर वर्ग की होनी चाहिए।
-नंदा बुर्से, शपथ आयुक्त, धार

दुष्कर्म पर है फांसी का प्रावधान
सरकार ने बालिकाओं की सुरक्षा और उनकी शिक्षा को लेकर कई कार्यक्रम चला रखे हैं। हाल ही में 'गुड टच-बेड टच' को लेकर वीडियो लांच किया गया है, जिनका प्रदर्शन कन्या स्कूलों में किया जा रहा है। इसमें सभी का सहयोग मिलना चाहिए। मप्र मानव अधिकार आयोग की ओर से बाल अधिकार के तहत १२ वर्ष तक की मासूम के साथ दुष्कर्म, अत्याचार पर फांसी का प्रावधान किया गया है। इस पर कड़ाई से पालन करवाने की जरूरत है।
-भारती दांगी, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी, धार