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दीक्षार्थी का वर्शीदान वरघोड़ा निकाला

जगह-जगह किया समाजजनों ने बहुमान

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Arjun Richhariya

Nov 30, 2017

ringnaud news

रिंगनोद. आचार्य मुक्तिचंद्र सागर सूरीश्वरजी महाराज की प्रेरणा से संयम पथ पर अग्रसर हो रहे सुचित पारलेचा का भव्य वर्शीदान वरघोड़ा निकाला गया तथा बहुमान किया गया। मंगलवार को नगर में मांगीलाल महेश कुमार चौरडिय़ा परिवार के निवास से दीक्षार्थी सुचित कुमार सुशील कुमार पारलेचा निवासी बाजना वाले का भव्य वर्शीदान वरघोड़ा निकाला गया। इसमें एक रथ पर मालवभूषण आचार्य नवरत्नसागर महाराज का चित्र एवं दूसरे रथ पर दीक्षार्थी भाई तथा एक अन्य पालकी में भगवान की प्रतिमा विराजित कर निकाली गई।
कार्यक्रम में अनमोल चौरडिय़ा ने स्वागत भाषण एवं रूपाली दीपक कोठारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को समाज के रमेशचंद कोठारी, विजय इमलीवाला, ज्योति कुंदन कोठारी, ललित कोठारी, आशीष पंवार, दीपक कोठारी, अभिषेक केमिस्ट, पिंकी पारलेचा सहित कई लोगों ने संबोधित करते हुए दीक्षार्थी के संसार की चकाचौंध छोड़कर दुर्लभ संयम पथ पर चलने की कठिन राह अपनाने की बहुत-बहुत अनुमोदना की। इसके बाद श्रीचारथुई श्रीसंघ, श्रीत्रिस्तुतिक जैन श्री संघ, अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद, अनाज तिलहन व्यापारिक संगठन एवं चौरडिय़ा परिवार की ओर से दीक्षार्थी का बहुमान किया गया। दीक्षार्थी सुचित पारलेचा ने उपस्थित समाजजनों को उनके परिवार द्वारा बाजना में आयोजित चार दिवसीय दीक्षा महोत्सव एवं बेंगलुरु में 14 दिसंबर को आचार्य मुक्तिचंद्र सागर सूरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में उनकी दीक्षा निमित्त होने वाले ५ दिवसीय महोत्सव में आने के लिए सभी से आग्रह किया। संचालन सागरमल कोठारी एवं आभार मांगीलाल चोरडिय़ा ने व्यक्त किया।

नीदरलैंड में पांचवीं से पढ़ाई जाती है गीता : चैतन्य कृष्ण
मनावर. भारत देश में आज भी गीता पर हाथ रखकर शपथ दिलवाई जाती है कि वह जो भी बोलेगा सच बोलेगा, लेकिन सच को जानने के लिए क्यों नहीं गीता को पढ़ लेते है। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम प्रतिदिन गीता का मनन करते थे। नीदरलैंड में कक्षा 5वीं से गीता पढ़ाई जाती है, लेकिन भारत व नेपाल में पता नहीं कब गीता पढ़ाई जाएगी। उक्त विचार गीता ज्ञान प्रचार समिति द्वारा आयोजित ज्ञान विज्ञान सत्संग के अंतिम दिन गीता जयंती पर चैतन्य कृष्ण महाराज ने व्यक्त किए। आपने कहा कि अगर हम कहीं जा रहे हैं और बिल्ली रास्ता काट जाए तो हम अपना रास्ता बदल देते हैं।
दिल्ली और बिल्ली पर विश्वास करने से कल्याण नहीं होने वाला। हमें अपने भगवान पर विश्वास करना होगा तभी हमारा कल्याण संभव है। कथा के अंतिम दिन गीता पूजन आशा नरेन्द्र कामदार ने किया। संतो का स्वागत अटल दरबार समिति के शांतिलाल पाटीदार, रामेश्वर पाटीदार, समीरमल जैन, पन्नालाल पाटीदार ने किया। समिति के अध्यक्ष नाथूलाल सोनी ने चैतन्य कृष्ण का सम्मान किया। संचालन रमेश कुशवाह ने किया।