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पहल : तालाब कम भरने खत्म हुई सिंगाड़े की खेती, पानी चोरी से मछली पालन पर संकट….इसलिए बोट से पानी की निगरानी

- पानी बचाने व तालाब को साफ रखने 90 हजार की बोट जनसहयोग से खरीदी समाजजनों ने- मांझी समाज की अनुकरणीय पहल, शहर की जीवन रेखा है मुंज तालाब

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धार

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Amit Mandloi

Oct 13, 2022

पहल : तालाब कम भरने खत्म हुई सिंगाड़े की खेती, पानी चोरी से मछली पालन पर संकट....इसलिए बोट से पानी की निगरानी

पहल : तालाब कम भरने खत्म हुई सिंगाड़े की खेती, पानी चोरी से मछली पालन पर संकट....इसलिए बोट से पानी की निगरानी

धार.

शहर का सबसे बड़ा और जीवन रेखा यानी भू-जल स्तर बनाए रखने में मदद मुंज तालाब को साफ करने के लिए मांझी समाज के लोगों ने पहल की है। मांझी समाज की आजीविका का सबसे प्रमुख स्त्रोत मुंज तालाब पर १९४ परिवार के1500 सदस्य आश्रित है। सिंगाड़े की खेती और मछली पालन से ये लोग अपना परिवार चलाते है। लेकिन बीते दो साल कम बारिश के चलते मुंज तालाब अपनी पूरी क्षमता के हिसाब से नहीं भर पाया था।

तालाब कम भरने के बावजूद कृषि के लिए किसानों ने पानी खिंचा। इससे तालाब जल्दी सूखा और मछली और सिंगाड़े की खेती दोनों प्रभावित हुई। लॉकडाउन में इस तरह के हालात बनने से इस साल मांझी समाज के लोगों ने जनभागीदारी से रुपए एकत्रित किए और ९० हजार रुपए की नई आधुनिक बोट खरीदी। जिससे तालाब की सफाई की आसानी से की जा सकती है और पानी चोरी रोकने के लिए तालाब पूरा चक्कर भी कम वक्त में लगाया जा सकता है।

दो घंटे लगते थे तालाब पार करने में

मांझी समाज के अध्यक्ष दुर्गा कदम ने बताया तालाब में मोटर डालकर पानी चोरी रोकने पर जब छोटी नाव से चप्पू चलाकर तालाब को पार करने निकलते थे, तब तक सिंचाई पूरी कर किसान मोटर निकाल लेते थे। ४९.५० हेक्टेयर में फैले तालाब में एक तरफ से दूसरी तरफ यानी अथर की तरफ जाने में दो घंटे लग जाते थे। इसलिए इस बोट को खरीदने का विचार आया और जनसहयोग से इस बोट को लेकर आए है।

सिंगाड़े की खेती हुई खत्म

पानी चोरी होने और कम बारिश के कारण तालाब में सिंगाड़े का बीज खत्म हो गया। अब भोपाल से दोबारा नया बीज लाकर तालाब में डालें, तब जाकर खेती शुरू होगी। लेकिन सिंगाड़े का बीज लाना और परिवहन काफी महंगा है। मुंज तालाब में मछली पालन और सिंगाड़े की खेती के लिए मत्स्य उद्योग सहकारी समिति नौगांव के १९४ सदस्य स्टेट टाइम से करते आए है। लेकिन बीते दो साल से सिंगाड़े की खेती खत्म हो गई है।

रेसक्यू में आएगी काम

समाज अध्यक्ष कदम ने बताया तालाब में डूबने पर भी समाज के युवा ही रेसक्यू अभियान में शामिल होते है। बोट छोटी होने से दो ही लोग तालाब में जा पाते है। इस बोट में एक साथ पांच लोग जाल के साथ जाएंगे, जिससे रेसक्यू में टाइम कम लगेगा। साथ ही इससे तालाब की सफाई भी आसान हो गई है। बोट आने के बाद समाजजनों ने मुंज तालाब में नाग मंदिर से शनिमंदिर तक सफाई अभियान चलाकर जलकुंभी को बाहर किया।