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भोजशाला नये मोड़ पर, मंदिर न मस्जिद, एक और दावा चौंकाने वाला, अहम सुनवाई थोड़ी देर में

Bhojshala New Twist: जैन समाज बना नया दावेदार, एक बार याचिका खारिज हुई, तो साक्ष्यों के साथ दूसरी की दायर, अब आ सकता है नया मोड़, याचिका पर सुनवाई थोड़ी देर में...

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धार

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Sanjana Kumar

Mar 20, 2026

Bhojshala new twist

Bhojshala new twist: जैन समाज ने दायर की याचिका, जैन परंपरा का महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र है भोजशाला (photo: AI)

Bhojshala New Twist: मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर अब एक और विवाद गहरा गया है। अब न ये मंदिर और न मस्जिद, नये दावे में एक प्राचीन गुरुकुल करार दिया जा रहा है। इस संदर्भ की एक याचिका लगाने वाला भी कोई दो पक्षों में से एक नहीं बल्कि तीसरा दावेदार है। हैरानी इस बात की है कि यह तीसरा दावेदार एक बार पहले भी याचिका लगा चुका है और इस बार दूसरी दफा याचिका लगाई है। जिस पर आज शुक्रवार 20 मार्च 2026 को अहम सुनवाई थोड़ी देर में शुरू होना प्रस्तावित है।

जैन समाज का दावा, महत्वपूर्ण शिक्षा का केंद्र

बता दें कि यह तीसरा दावेदार है जैन समाज। जैन समाज ने जो याचिका एमपी हाईकोर्ट में लगाई है उसमें कहा गया है कि भोजशाला का इतिहास केवल हिंदू या मुस्लिम धार्मिक स्थल के रूप में सीमित नहीं है, बल्कि यह जैन परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र भी रहा है। यही नहीं जैन समाज ने याचिका में तर्क भी दिया है कि पुरातत्व सर्वेक्षण और विभिन्न ऐतिहासिक साक्ष्यों में यहां जैन धर्म से संबंधित मूर्तियों और प्रतीकों के प्रमाण मिले हैं।

ASI की रिपोर्ट का दिया हवाला

इस याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक सर्वे में जो मूर्तियां मिली हैं, वे जैन तीर्थंकरों तथा देवी अंबिका से जुड़ी बताई जाती हैं। साथ ही विदेशों के संग्रहालयों में संरक्षित कुछ प्रतिमाएं भी इस दावे को मजबूत करती हैं कि भोजशाला का संबंध जैन परंपरा से रहा है।

गौरतलब हे कि इस मामले में जैन समाज की यह दूसरी याचिका है। इससे पहले दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन भविष्य में दोबारा याचिका दायर करने अनुमति भी दी थी। अब जैन समाज ने संशोधित तथ्यों और नए साक्ष्यों के आधार पर यह नहीँ जनहित याचिका प्रस्तुत की है।

याचिका में कहा गया है कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि प्राचीन काल में ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रहा है। जहां विभिन्न धर्मों की शिक्षा दी जाती थी। जैन समाज का दावा है कि यहां आदिनाथ भगवान और नेमिनाथ भगवान की प्रतिमाएं स्थापित थीं और यह स्थान एक गुरुकुल के रूप में विकसित था।

नये दावे के बाद विवाद एक नये मोड़ पर

भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चला आ रहा है। इसमें एक पक्ष जहां इसे मां सरस्वती का मंदिर बताता है, तो दूसरा पक्ष कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता है। अब जैन समाज के इस नये दावे के बाद विवाद एक नया मोड़ ले सकता है।

सुनवाई थोड़ी देर में

जैन समाज की इस याचिका पर हाईकोर्ट में थोड़ी देर में सुनवाई होनी है, जिसे अहम माना जा रहा है। कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस ऐतिहासिक पहचान और उपयोग को लेकर आगे क्या दिशा तय की जानी है। फिलहाल सभी पक्षों की नजरें कोर्ट की कार्यवाही पर ही टिकी हैं।