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कर्म काला तो क्या करेगी रूद्राक्ष की माला

शिव पुराण का चौथा दिन: डेढ लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे चौबीस अवतार मंदिर

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कर्म काला तो क्या करेगी रूद्राक्ष की माला

क्षेत्रीय विधायक पत्नी के साथ व्यासपीठ की पूजा करते हुए।

देपालपुर .यदि मनुष्य का कर्म काला है तो रुद्राक्ष की माला भी क्या करेगी। रुद्राक्ष की माला भी तब असर दिखाती है, जब उसके कर्म अच्छे होते हंै। जब हम भगवान को समय देते हैं तो भगवान भी हमे समय देते हैं। धन से अच्छे तन से परमात्मा नहीं मिलते परमात्मा से मिलना है तो मन शुद्ध रखना होगा और 11 इंद्रियों में सबसे चंचल कोई है तो वह मन है। उस मन को भक्ति में लगाओ। यह बात 24 अवतार मंदिर में शिव महापुराण के चौथे दिन पं. प्रदीप मिश्रा ने कथा में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा भक्तों के बीच कहे। इस दौरान पार्वती विवाह का जब स्मरण सुनाया। तब भक्त भाव विभोर हो गए। व्यास पीठ का पूजन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज पटेल व उनकी पत्नी मंगलेश पटेल, विधायक विशाल पटेल व उनकी पत्नी कुसुम पटेल, मंदिर ट्रस्ट उपाध्यक्ष सुलोचना पटेल, मुख्य यजमान बब्बी दरबार उनकी पत्नी शिवकुवर चौहान, मंदिर ट्रस्ट सचिव चिंटू वर्मा व उनकी पत्नी दीप्ति वर्मा के साथ दानदाता अशोक वर्मा, मुरलीधर शर्मा, जगदीश बड़वाया, संतोष राव सनस, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संतोष ठाकुर, एसडीएम रविकुमार सिंह, प्रवीण जैन सहित कई दानदाताओं ने किया।
पंडाल में 12 बजे से भक्तों का आना शुरू हो गया था 3 बजे तक पूरे पंडाल भर गया। मंगलेश्वर मंदिर में एलइडी लगाकर व सामने माइक रखकर भक्तों को कथा का श्रवण करवाया। मन्दिर ट्रस्ट सचिव चिंटू वर्मा ने कथा के प्रारंभ में मन्दिर की वार्षिक गतिविधियों की जानकारी श्रद्धालुओं को देते हुए पूज्य गुरुदेव जय करणणदास महाराज की महिमा का मंडन किया।
पं. मिश्रा ने भक्तों को शिवपुराण की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि मंदिर और शिवालय में अंतर है। मंदिर में भगवान की मूर्ति होती है, जबकि शिवालयों में शिवलिंग होता है। शिवालय में एक लोटा जल, एक पुष्प, एक दाना चावल का चढ़ाओगे तो वह 33 करोड़ देवताओं को चढ़ता है।
महिला दिवस पर गिफ्ट व प्रमाण पत्र की जगह सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहिए
पं. मिश्रा ने बेटियों से आव्हान व बेटियों से निवेदन है किया है कि जब पिता तुम्हारे लिए खुली किताब है। पिता ने तुम्हे पढऩे-लिखने की आजादी दी है। कपड़े पहनने मौज मस्ती करने खाने-पीने की तो आप अपने पिता का अभिमान कभी कम मत होने देना क्योकि जिनके घरों में बेटियां हंै और उनके माता-पिता उनके कन्यादान न करे तो उन्हें 94 लाख योनियों में नरक भोगना पड़ता है।
महाराज ने कहा कि अभी कुछ दिन पूर्व ही महिला दिवस गया है। इस दिन महिलाओं को प्रमाण-पत्र, गिफ्ट दिए गए मगर मेरा मानना है कि उसे कुछ देना है तो उसे सुरक्षा दो, उसको सम्मान दो। बेटियां आजादी से घूम सके उसके साथ कोई हरकत हो। अगर आपने बहन बेटियों की सुरक्षा का जिम्मा ले लिया तो वही बड़ा दिन होगा।
50 बार सोचकर देना
बेटा मां को प्रिय होता है और बेटियां पिता को प्यारी होती है। यदि बेटी को दु:ख होता है तो सबसे पहले पिता की आंखों मे आंसू आते हंै। मनुष्य को गाय, बेटी और लक्ष्मी को देने के पहले 50 बार सोचना चाहिए। सोमनाथ का ज्योर्तिलिंग पिता और पुत्री के प्रेम का प्रतीक है।